कहीं मिथोमैनिया तो नहीं – सरल उपचार Is there Mythomania – Simple Remediesdies

कहीं मिथोमैनिया तो नहीं – सरल उपचार

झूठ बोलने की बीमारी मिथोमैनिया के नाम से जानी जाती है।

झूठ बोलना भी बीमारी के रूप में शामिल होता है। यह एक मानसिक बीमारी है। झूठ बोलने की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं।

कुण्ठा ग्रस्त रहना।

हीन भावना महसूस करना।

झूठी प्रतिष्ठा व मान दिखाने के लिए स्वयं को अधिक प्रतिष्ठित करना।

बात-बात में झूठ बोलने के व्यवहार से यह एक आदत बन जाती है और एक सीमा बाद झूठ ही सत्य लगने लगता है। यह भावनात्मक व्यवहार हितकर नहीं होता और कभी-कभी सबके सामने शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ जाती है या अपमानित होना भी पड़ सकता है क्योंकि झूठ अधिक लम्बा भाग नहीं सकता है। यह सच है कि झूठ के पैर नहीं होते हैं।

जीवन मूल्यों का हृास होने लगता है जिससे परिवार व समाज के बीच छवि खराब होने लगती है और लोग तवज्जों देना कम कर देते हैं। झूठ बोलने वाले व्यक्ति से लोग कतराने लगते हैं। एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ जाते हैं।

झूठ बोलने से बचने के लिए यह करें सरल उपचार

बोलने से पहले हर बार एक बार जरूर सोचें की बात में कितनी सत्यता और यथार्थ है।
बचपन से ही माता-पिता का दायित्व व कर्तव्य है कि यदि बच्चा झूठ बोलता दिखाई दें तो तुरंत रोकें और बच्चे के व्यवहार को समझ कर उसके साथ अनुकूल व्यवहार करें।

लड़का या लड़की हो दोनों को ही प्यार से समझाएं। कभी भी डांट-फटकार व मजाक नहीं बनाएं और ना ही किसी अन्य के सामने दण्डित करें अन्यथा आदतें सुधरने की बजाए और बढ़ सकती है और भावनात्मक रूप से आहत होने पर स्थितियां बिगड़ भी सकती है।

जिस झूठ को सच समझ रहें हैं उसे साबित करके झूठ की आदत को खत्म किया जा सकता है। इसके प्रति अभ्यासित रहें।

झूठ के साथ अनेक गलत व्यवहार भी धीरे-धीरे कब आने लगता है पता ही नहीं लगता। ईर्ष्या, द्वेष व चुगलखोरी आदि आदतें पनप जाती है।

इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास से इस आदत से छुटकार आसानी से पाया जा सकता है।

झूठ से फायदा नहीं होता लेकिन नुकसान बहुत होता है। रोज 5-10 मिनट आँख बंद करके ललाट पर सफ़ेद रंग का ध्यान करें। सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगते हैं।

अच्छे व्यक्तित्व वाले लोगों से मेल जोल रखें उनके साथ कुछ समय बिताएं।

माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों के सामने बिल्कुल झूठ नहीं बोलें बल्कि आत्म निरीक्षण की भावनाएं विकसित की जानी चाहिए जिससे झूठ को बढ़ावा नहीं मिल सकेगा और बच्चों में झूठ बोलने की आदतों का विकास रूक जाएगा।

कहीं मिथोमैनिया तो नहीं, सच बोलने के लिए दण्ड नहीं बल्कि पुरस्कार दिया जाना चाहिए जिससे बच्चे सच के प्रति अडिग बने रहें। झूठ से बचने के लिए प्रोत्साहित बने रहें और बचाव के लिए झूठ का सहारा कभी नहीं लें सकें। 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*