बाजारू खाद्य पदार्थों का सेवन बंद करें

भ्रमित कर देने वाले मनभावक रंग-बिरंगे पैकेट, डिब्बा बंद भोज्य पदार्थ, पाऊचों का बाजार वर्तमान में तेज गति से बढ़ रहा है। बच्चे, युवा, प्रौढ़ अथवा वृद्धों के मुहँ में भी इन्हें देखकर पानी भर आता है। ये सभी स्वास्थ्य के रक्षक नहीं भक्षक है। इनमें एक ओर कत्रिम खुशबू, रंग, स्वाद, रसायन मिलाए जाते हैं तो दूसरी ओर इनमें गुणवत्ता तथा पौष्टिकता नगण्य है।
गुण तो बता दिए जाते हैं लेकिन अवगुण छिपा लिए जाते हैं कि इनको स्वादिष्ट तथा आकर्षक बनाने के लिए कौन-कौन से रसायन मिलाए गए है, कितनी मात्रा में प्रिजरवेटिव मिलाए गए है इन्हें तलने, भुनने व परिष्कृत करने में कौन-कौन से तत्त्व हटा दिए गए है इसका उल्लेख कभी नहीं मिलता।
कारण
सुविधा भोगी तथा श्रम विहिन जीवन शैली तथा आलस्य के चलते प्राकृतिक भोजन से दूरी बन चली है।
चका-चौंध कर देने वाले विज्ञापनों के झाँसें में हर एक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
अनेक बीमारियों की उत्पत्ति
डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों के अधिक प्रयोगों से मोटापा, कैंसर, रक्तचाप, मधुमेह, कब्ज, हृदयरोग तथा संक्रमण आदि उत्पन्न होने की अत्यधिक संभावना रहती है।
उपचार
डिब्बा बंद आहार से दूर रहने का एकमात्र उपचार है कि अपने भोजन में प्राकृतिक भोजन विधिवत् शामिल करके रंग-रसायनों व कृत्रिमता के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।
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