अपना रेडिएशन सकारात्मक मोड पर रखें। Keep your radiation on positive mode.

अपना रेडिएशन सकारात्मक मोड पर रखें।


देश, काल और परिस्थिति सदैव बदलती रहती है। समझदार बनकर इन तीनों का उपयोग करना आना चाहिए। अपने गुरू या महान् पुरूष के आदर्शों के साथ हमें जुड़ जाना चाहिए क्योंकि यह सब हमें प्रकृति से जोड़ देते है और स्वयं का साक्षात्मकार करा देते हैं। व्यक्ति के मन का अशांत और दुखी होना कम हो जाता है।


जब परिस्थिति या लोग हमारे अनुकूल नहीं हो तो हमें सहनशील बनकर प्रतिक्रिया देने के साधारण तरीकों से ऊपर उठ जाना चाहिए।
सहनशीलता तब आएगी जब हम यह समझ लेते है कि हर व्यक्ति हमसे भिन्न है साथ ही विचार, भावनाएं तथा दृष्टिकोण भी अलग होते हैं। इसी समझ से हमें लोगों को वैसा ही स्वीकार करने में मदद मिलती है जैसेकि वे हैं। हमारे भीतर दूसरे लोगों और उनके संस्कारों को बर्दाश्त करने की शक्ति आ जाती है।

ऐसे लोगों या आदतों की सूची बनाईए जिन्हें बर्दाश्त करना मुश्किल लगता है। इसके बाद फिर एक विचार बनाएं कि मैं उनके इस संस्कार को स्वीकार करता हूँ और आज के बाद उनका यह संस्कार मेरे दिल व दिमाग को परेशान व विचलित नहीं करेगा।
प्रत्येक विचार, शब्द और कर्म के पीछे छिपा हुआ अर्थ हमारी चेतना का बहुत खास पहलू है। ब्रह्मण्ड की ऊर्जा व कंपनों की गुणवत्ता से हमारी चेतना प्रभावित होती है।


जब मन का इरादा निर्मल व विशुद्ध, सकारात्मक और कल्याणक हो तथा उसके पीछे कोई शर्त नहीं हो तो प्रेम, शांति, प्रसन्नता, मंगलता और सत्य की ऊर्जा के सकारात्मक कंपन प्रवाहित होते हैं।

जिस तरह का स्वभाव या व्यक्तित्व होता है उसी तरह के कंपन हमारे भीतर से हमेशा निकलते रहते हैं। मन व बुद्धि के भीतर की गतिविधियों की गुणवत्ता जितनी ऊंची होगी उतने ऊँचे स्तर की ऊर्जा उस वक्त निकलेगी और उस समय ऐसा एहसास होने लगता है जैसेकि हम आध्यात्मिक ऊर्जा के रेडिएटर है और नींद में भी हम अपने व्यक्तित्व को रेडिएट करते रहते हैं। हमारा व्यक्तिम्व जितना शुद्ध होगा रेडिएशन भी उतना ही शुद्ध होगा।


एक-दूसरे से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का आदान-प्रदान चुपचाप चलता रहता है हमें आभास भी नहीं होता है और यह सब काम अपने आप होता है फिर भले इसके प्रति कोई इरादा हो या नहीं फिर भी गुणों का लेन-देन चलता रहता है इसलिए अपना रेडिएशन हमेशा सकारात्मक मोड पर रखना चाहिए जिससे अन्य लोगों, अपने आस-पास के वातावरण और ब्रह्मण्ड से अच्छे कंपनो ंका प्रवाहन हमारे भीतर हो सकें।

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