रोबोट नहीं बनें संतुलित काम करें। Don’t be a robot, do balanced work.

रोबोट नहीं बनें संतुलित काम करें-


कामकाजी महिलाओं और पुरूषों के लिए कार्यस्थल पर कई बार ऐसे मौके होते है कठिन श्रम करने के बाद भी जब मन बहुत दुःखी हो जाता है। काम की मारामारी से चिड़चिड़ाहट होती है। अपने सहकर्मियों को देखकर अफसोस तो कई बार ईर्ष्या भी होती है।

कार्यालय में यदि रोते है या चीखते-चिल्लाते हैं तो छवि खराब होती है और लोग ऐसे व्यवहार को पसंद नहीं करते हैं लेकिन अधिक लम्बे समय पर भावनाओं को दबा कर रखना भी हानिकारक हो सकता है।

चिंता को नकारने की कोशिश करें-यह सही है कि चिंता से ही भविष्य जुड़ा होता है और काम समय पर पूरा हो सकता है लेकिन जब यह सामान्य स्थिति में हो। भविष्य के काम की चिंता वर्तमान कामों को बिगाड़ देती है, इसलिए वर्तमान समय के काम व जिम्मेदारी पूरी करने पर ध्यान देना भला है। वर्तमान काम में मन लगा लेने से चिंता होने वाले कारण अपने आप ही भूलते जाते हैं।

निराशा से दूर रहकर आशावादी बने रहें-निराशा, हताशा, अखुश रहना आदि मनोदिशाएं उन्नति में बाधक होती है। छोटे-छोटे संकल्प प्रेरणा स्रोत बन जाते हैं इसलिए वास्तविकता को परख कर विफलता के कारणों को ढूंढ़कर सफलता के लिए फिर प्रयास करें।

गुस्सा आएं तो फटाक से बम न फोड़े-गुस्सा दबाकर रखने से कई मानसिक समस्याएं पैदा हो जाती है इसलिए गुस्से को दबाना ठीक नहीं लेकिन अपने सहकर्मियों या वरिष्ठ बॉस पर सीधे गुस्से से प्रहार नहीं करके बड़े ही संयम व नम्रता के साथ अपनी बात रख कर नाराजगी जता देनी चाहिए।

कार्यस्थल पर कई बार नकारात्मक संवेंगों का सामना होता है बेहतर है कुछ क्षण का ध्यान कर लिया जाएं, अपनी सीट के उठ कर जरा टहल लिया जाएं, वाशरूम का चक्कर ही काट आएं, पानी से मुंह धो आएं या एकाध मिनट लम्बा श्वास लें और छोड़ने की क्रिया करें।

ईर्ष्या को सकारात्मकता में बदलें-किसी की उन्नति या कामों से कभी-कभी ईर्ष्या होने लगती है, इस ईर्ष्या का इस्तेमाल सकारात्मक रूप से खुद पर करें। दूसरों को कोसने के बजाए स्वयं भी लक्ष्य हासिल करने के प्रयास करें और उन कारणों को ढूंढ़े जिनके कारण आप काबिल होते हुए भी पीछे रह गए है। ईर्ष्या स्व-विकास का अवसर देती है। किसी की बुराई, चुगली या निंदा के बजाए अपनी ऊर्जा बेहतर कामों में या कुछ नया सीखने में लगाएं।

रोबोट बनकर काम के पीछे भागना छोड़ कर कुछ पल बीच-बीच में ब्रेक ले और तनाव रहित रहकर अपना कार्य आनन्द के साथ पूरा करें। रोबोट नहीं बनें संतुलित रूप से काम करें।

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