वात का शमन ऐसे करें कुछ आसान उपाय Some easy ways to quench Vata.

वात का शमन ऐसे करें कुछ आसान उपाय-
वात, पित्त और कफ संतुलित रहते है तो धातु और असंतुलित व विकृत होने पर दोष कहलाते हैं। यह तीनों त्रिदेव है एक ओर तो शरीर में अच्छी संतुलित अवस्था रहने पर अच्छा स्वास्थ्य देते है तो दूसरी ओर दूषित व विकृत होने पर ये त्रिदोष बन जाते हैं और शरीर को अस्वस्थ कर देते हैं।
पित्त और कफ वात के सहारे ही शरीर में सक्रिय रह पाते हैं और गमन करते हैं।


वायु के गुण-रूखी, हल्की, शीतल, कठोर, खुरदरी, स्वच्छ, सूक्ष्म व चल है।

वात के कुपित होने के कारण-वात प्रधान गुण के आहारीय सेवन व कार्यों के अभ्यास से वात शरीर में बढ़कर कुपित हो जाता है।

श्वास गति का तेज होना वात के कुपित होने का ही परिणाम है।

वात कुपित होने के दो मुख्य कारण है एक तो असंयमित, अनियमित व अनुचित आहार-विहार और दूसरा शरीर से मल निष्कासन भलीं-भांति नहीं होना अर्थात कब्ज रहना। इन दोनों कारणों से वात अधिक कुपित हो जाती है। मल जब आंतों में पड़ा रहता है और बाहर नहीं निकलता तब वह सड़ने लगता है और सड़न से गैस उत्पन्न होने लगती है। पेट खराब होने का मुख्य अमाशय में भोजन का पड़ा रहना।

तीक्ष्ण, कटु, कषाय रस, आहार की अल्प मात्रा लेना, भूखा रहना, रूखा भोजन, चिंता, भय, दुःख, शोक, देर रात्रि तक जागना व कामादि क्रियाओं व चिंतन से वात कुपित हो जाता है।

वात प्रकोप के लक्षण-पेट फूलना, भोजन के बाद आफरा, बार-बार अपानवायु निकलना, डकार, हिचकियां, जोड़ों में दर्द, सिर में दर्द व भारीपन, घबराहट होना, ष्शरीर में खिंचाव होना, त्वचा में खुश्की, मुंह का सूखना, प्यास लगता तथा ष्श्वास फूलना आदि लक्षण प्रकट हो सकते हैं।


ंकुपित वात का शमन करने वाले पदार्थ-दैनिक चर्या और आहार मौसम के अनुकूल होनी चाहिए। वात को बढ़ाने व प्रभावित करने वाले गुण पदार्थों का सेवन नहीं करके इसके विपरीत गुणों वाले पदार्थों को आहार में शामिल किया जाना चाहिए। स्निग्ध, हल्का, गर्म, मृदु, भारी, द्रव, स्थूल, स्थिर, रेशेदार, चिकना, चिपचिपा व गीला, ढ़ीला, नरम और कोमल प्रकृति का आहार का सेवन करना उपयोगी है। हल्का व सुपाच्य भोजन का चुनाव करना चाहिए।


अधिक देर तक भूखा रहना ठीक नहीं सायंकालीन भोजन साढ़े सात बजे तक कर लेना उचित है या सोने से दो-तीन घंटे पहले भोजन करना ठीक है जिससे भोजन आसानी से पच जाएं। रूखे, बासी, शीतल व भारी आहारीय पदार्थों के सेवन से बचें।

नहीं करें-
जिन्दगी बहुत छोटी है जिसे लम्बी और स्वस्थ जीना है। बुरे, नकारात्मक व दूषित विचारों को अपने पास ही नहीं फटकने दें।
रात्रि में दही का सेवन नहीं करें।
जामुन के गुण-यह मधुर व अम्ल रस वाला हल्का व शीतल है। त्वचा रोग, कफ व पित्त नाशक व जलन मिटाने वाला, रक्त में शर्करा की कमी करता है और रक्त को शुद्ध करता है। भोजन के थोड़ी देर बाद थोड़ी ही मात्रा में जामुन पर काला नमक बुरक कर खाना चाहिए।
जामुन की अधिक मात्रा खाने से जीभ में ऐंठन और वात का प्रकोप हो जाता है।


वात का शमन ऐसे करें कि पसीने से लथपथ की स्थिति में घर व बाहर दोनों ही जगह पानी का सेवन नहीं करें। पसीने को सुखाकर ही पानी पीना चाहिए। तेज धूप में गर्मी व पसीने की स्थिमि में शरीर के ठण्डा होने पर ही पानी का सेवन करना चाहिए।

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