डर्माटाईटिस : गुदा के आस-पास दानें या दरोरें क्यों निकलते है-
गुदा के आसपास की त्वचा पर दरोरें या छोटे-छोटे दाने निकल जाते है जिनमें सूजन और लाली के साथ बार-बार खुजलाहट भी होती है।
यह सम्पर्क से होने वाला रोग है अर्थात् स्पर्श त्वचा रोग है जिसमें त्वचा में सूजन और लाली उत्पन्न हो जाती है।

जब त्वचा में जलन पैदा करने वाली वस्तु या पदार्थ का सम्पर्क होता है तब यह रोग लग जाता है। गुदा के टिश्यू में बहुत सारे छिद्र होते हैं जोकि बहुत ही नाजुक भी होते हैं।

क्या कारण हो सकते हैं?
सिंथेटिंक कच्छा या अंडरवियर का प्रयोग करना।
शॉवर जेल, रंगीन टॉयलेट पेपर, सुगंधित साबुन या डिटर्जेंट का प्रयोग करना।
परफ्यूम या कलर डाई का गुदा के आस-पास सम्पर्क हो जाना।
किसी भी चीज से एलर्जी की प्रतिक्रिया हो जाना।
तेज मसाले, कॉफी, अल्कोहल, कोला आदि का प्रयोग भी कारण बन सकता है।
अधिक मोटापा, एंटीबॉयोटिक दवाएं, नीबू प्रजाति के फल या विटामीन सी की गोलियों के अधिक सेवन से भी यह समस्या प्रकट हो जाती है।
जननांगों की पूर्ण सफाई का ख्याल नहीं रखे जाने की बार-बार अवहेलना करना।
सरल उपचार
सबसे पहले जाँच करवाए कि कहीं बवासीर, पिनवर्मस, फंगल या यीस्ट संक्रमण तो नहीं है।
बवासीर, पिनवर्मस, फंगल या यीस्ट संक्रमण है तो प्रथमतः इन्हें उपचार द्वारा दूर करें और यदि नहीं है तो मल त्यागने के बाद स्थान को अच्छी तरह पानी से साफ करें।
फिटकिरी का चूर्ण का पानी की कुछ बूंदों की सहायता से गाढ़ा मिश्रण तैयार करके गुद्वा द्वार पर लेप लगाएं। दिन में तीन-चार बार लगाया जा सकता है।
दिन में तीन-चार बार गुदा द्वार के आस-पास बर्फ का चूरा मलें या बर्फ का टुकड़ा लेकर बर्फ मलें।
खुजली होने पर कोशिश करें कि बार-बार वहाँ खुजलाने के लिए हाथ नहीं जाएं अन्यथा बार-बार खुजाने से त्वचा छिल सकती है, घाव हो सकते हैं और संक्रमण भी गहरा हो सकता है।

डिटोल की कुछ बूंदे या नीम के पत्ते उबाल कर इस पानी से नहा लेना सर्वश्रेष्ठ है। सुगंधित, तेल, साबुन, परफ्यूम्स व रंगीन तथा खुरदरे टॉयलेट पेपर के प्रयोग से बिल्कुल बचें।
जिन वस्तुओं से संक्रमण की संभावना हो उन वस्तुओं को रोग ठीक होने तक बिल्कुल त्याग दें और यदि ठीक होने के बाद इन्हीं वस्तुओं के पुनः प्रयोग से समस्या फिर प्रकट हो जाती है तो ऐसी चीजों व पदार्थों का पूर्ण रूप से वर्जन करें।

डर्माटाईटिस : गुदा के आस-पास दानें या दरोरें निकलने पर नीम का तेल लगाकर रखें।
विशेषतः रात्रि को सोते समय कपड़े बिल्कुल ढ़ीले-ढ़ाले पतले हवादार पहनें और तंग कपड़े पहनने से बचें।
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