ना बोलना जरूरी है! हाँ हाँ करके काम से लदे नहीं।
कार्यालय में या वर्क फ्राम होम में कई कर्मी कार्य दबाव के कारण शारीरिक और मानसिक रूप से तनाव ग्रस्त रहने लगे हैं। जिस व्यक्ति में कार्य अनुशासन व जिम्मेदारी होगी वह शीघ्रताशीघ्र कार्य पूर्ण करने की कोशिश करेगा और समय से पहले ही कार्य पूर्ण करके प्रस्तुत भी कर देगा लेकिन यह भी सही है कि ऐसे ही कर्मियों को अधिकतम कार्य दबाव दिया जाता है क्योंकि बॉस को यहीं से कार्य शीघ्र और पूर्ण होने की उम्मीद होती है।

ऐसे में कई लापरवाह कर्मियों की पौ बारह बनी रहती है वे सदैव छोटे-छोटे कार्य से भी बचे रहते है। ऐसी स्थिति में कार्यशील और कर्मठ कर्मियों पर अनावश्यक दबाव व परेशानी निरंतर बनी रहती है।

यदि बॉस कठोर हो या आपको उनसे बताने में झिझक होती है या उनसे संवाद कम या नहीं के बराबर होता है, तब भी हिचक छोड़नी ही पड़ेगी और अपने कार्य दबाव की स्थिति से उन्हें अवगत कराएं क्योंकि वहीं से एक समाधान निकल सकता है।
काम के बोझ से दबे होने पर सह कर्मियों को राग अलापने से कोई निष्कर्ष नहीं निकलने वाला है केवल समय तथा व्यवहार की बर्बादी है।
बॉस से मदद मांगिए-समस्या का समाधान बॉस ही कर सकते हैं। बॉस के सामने बात करते हुए शब्दों के टोन पर विनम्रता का ध्यान रखते हुए मदद मांगिए। बॉस आपकी समस्या समझेंगे और इंकार कभी नहीं करेंगे, कुछ न कुछ हल जरूर निकालेंगे।

बॉस से निवेदन करें शिकायत नहीं-अत्यधिक कार्य दबाव से मन व शरीर से थकान से ग्रस्त रह रहे हैं तो अन्य कर्मियों से स्वयं की तुलना न करके आपके पास जरूरत से ज्यादा कार्य की स्थिति से बॉस को निवेदन के रूप में अवगत कराएं। दूसरे क्या कर रहें समझना और समझाना छोड़कर शिकायत या आरोप का लहजा प्रयोग नहीं करें।
स्पष्ट रूप से परेशानी बताएं-बात घुमा फिरा कर नहीं बोलें। यह पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो आप बॉस को कहने जा रहे हैं उससे संस्था या अपने सह कर्मियों पर कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बॉस की दुविधा को समझे-बॉस पर संस्था अथवा कंपनी की पूर्ण जिम्मेदारी होती है। लक्ष्यों की प्राप्ति व विकास के लिए बॉस को चारों तरफ कार्य पूर्णता का लक्ष्य साधना पड़ता है और दबाव आप पर ही नहीं है बॉस पर भी दबाव रहता है, इसलिए बॉस की दुविधा को समझते हुए अपना पक्ष रखना चाहिए। व्यक्तिगत समस्याओं से अवगत कराने से सदैव बचना चाहिए जब तक कि बहुत ही जरूरी नहीं हो।

ना बोलना जरूरी है! हाँ हाँ करके काम से लदे नहीं। अच्छे काम करते रहिए-कार्य क्षमता को दुरूस्त रखते हुए आपके बार-बार किए गए अच्छे कार्य कभी छिप नहीं सकते हैं। कार्य समस्या बढ़ने पर असहज अनुभव नहीं करें कि बॉस क्या कहेंगे या अन्य कर्मी क्या कहेंगे। यह सोच कर स्वयं ही हाँ हाँ करके कार्य खुद पर लादे नहीं जाए। बॉस के लिए आप सदैव आधार बनने के लिए खुद को प्रेरित भी करते रहें और पूर्ववत कर्मठ भी बने रहें। हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।
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