इनर वियर से भी जुड़ा है आपका स्वास्थ्य जानिए कैसे? Your health is also related to inner wear, know how?

इनर वियर से भी जुड़ा है आपका स्वास्थ्य जानिए कैसे?

महिलाओं, पुरूषों, युवा, वृद्ध तथा बच्चों सभी के लिए शरीर के नाजुक तथा कोमल अंगों की सुरक्षा और देखभाल के लिए अन्तःवस्त्रों की महत्त्वपूर्ण उपयोगिता है इनके प्रति आमतौर पर लापरवाही बरती जाती है जोकि कतई उचित नहीं है।

सस्ते या फैशन के चक्कर में सिंथेटिक, प्लास्टिक, नायलॉन या निम्न गुणवत्ता के वस्त्र का प्रयोग करना कई त्वचा रोगों के पैदा होने का कारण बनता है।

घटिया क्वालिटी के अन्तःवस्त्र का प्रयोग करने से दाद, खाज, खुजली, फंगल संक्रमण या मूत्र संक्रमण का प्रकोप भी प्रकट हो सकता है।

बाहरी चमक-दमक, आकर्षक, सुंदर, डिजाइनर, फैन्सी व सस्ता के मद्धेनज़र अन्तवस्त्रों की अवहेलना मत कीजिए बल्कि सूती, समुचित आकार और सही नाप के वस्त्रों का चयन और प्रयोग करना चाहिए।

घटिया दर्जे की इलास्टिक और मेटल के हुक शरीर के नाजुक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।

चर्मरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि नॉयलान या अन्य कृत्रिम रेशों से बने अन्तःवस्त्रों का प्रयोग करने से हवा का आवागमन बाधित होता है साथ ही रंगों के रसायन सीधे शरीर को छूने से एलर्जी, त्वचा पर धब्बे, इरिटेशन या कांटेक्ट डर्मेटाईटिस नामक चर्म रोग भी हो सकता है।

अन्तःवस्त्रों को यदि अच्छी तरह साफ नहीं रखा जाएं, पसीने, नमी या गीलेपन की वजह से बदला नहीं जाए तो गुप्तांगों में दाद, खुजली, मूत्र व फंगल संक्रमण हो सकता है। रोज अन्तःवस्त्र बदलने चाहिए और भलीं-भांति साफ रख कर धूप में सुखाने चाहिए।

जननांगों के आस-पास का क्षेत्र सूखा रखें गीलापन, पसीना व नमी से तुरंत बचाव करें। महिलाओं और पुरूषों दोनों के लिए सफाई आवश्यक है अन्यथा त्वचा व अन्य गंभीर बीमारियों से पीछा छुड़ाना मुश्किल भी हो जाता है।

घटिया रबड़, प्लास्टिक या इलास्टिक के कारण त्वचा पर दाग, धब्बे या सफेद निशान भी पड़ जाने की आशंका रहती है।

हमेशा सूती कपड़े से निर्मित अन्तःवस्त्रों का चुनाव करना ही लाभदायक है। अधिक तंग, चुस्त व कसे हुए अन्तःवस्त्रों का चुनाव करने से बचें क्योंकि इनर वियर से भी जुड़ा है इनर वियर से भी रक्त संचारण बाधित होता है।

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