सिंथेटिक दूध जीवनदायक नहीं जीवननाशक है? Synthetic milk not life-sustaining?

सिंथेटिक दूध जीवनदायक नहीं जीवननाशक है-

खाने-पीने की चीजों के साथ दूध में भी केवल मिलावट ही नहीं बल्कि केमिकल्स की मदद से पूरी तरह नकली दूध का उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है।

दूध वाला जो दूध लेकर आ रहा है और आप बड़े चाव से पी रहे हैं हो सकता है कि यह सिंथेटिक दूध हो क्योंकि सिंथेटिक दूध बिल्कुल हुबहू असली दूध के जैसे ही नज़र आता है।

सिंथेटिक दूध क्या है?

सिंथेटिक दूध जीवनदायक नहीं, सिंथेटिक दूध तैयार करने में यूरिया, कास्टिक सोडा, जानवर की चर्बी, रिफाईंड तेल, शैम्पू अथवा डिटर्जेंट आदि से तैयार किया जाता है।

शैम्पू अथवा डिटर्जेंट शेम्पू मिलाने से ऑयल या रिफाईंड तेल पानी में आसानी से मिल जाता है और दूधिया रंग का झागदार मिश्रण तैयार आसानी से तैयार हो जाता है। ऑयल या रिफाईंड तेल दूध में मिलने से फैट अथवा वसा की जगह ले लेता है जिससे चिकनाई आ जाती है। कास्टिक सोडा और तैयार मिश्रण अच्छी तरह से घुल जाता है और नकली दूध का स्वाद देर तक खट्टा भी नहीं होता है। यूरिया और ष्शक्कर मिलाने से वसा रहित ठोस पदार्थ का लेवल असली दूध में पाए जाने वाले लेवल के बराबर हो जाता है। इस तरह सिंथेटिक दूध बनाने का खर्चा मात्र 5 रूपए के लगभग आता है जबकि असली दूध का खर्चा 50 रूपए लगभग आता है।

सिंथेटिक दूध का फायदा कुछ भी नहीं बल्कि नुकसान ही नुकसान अधिक है। इस दूध का सेवन कैंसरकारी प्रभाव छोड़ता है। यूरिया और कास्टिक सोडा हार्ट, लिवर और गुर्दों के लिए बेहद घातक है क्योंकि यूरिया को शरीर से बाहर निकालना गुर्दों के लिए आसान नहीं होता है।

कास्टिक सोडा में स्थित सोडियम हार्ट और हाईपरटेंशन रोगियों के लिए धीमा जहर बन रहा है। श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, उत्सर्जन तंत्र व पित्ताशय पर खतरनाक जानलेवा प्रभाव डालता है।

गर्भवती महिलाओं व गर्भ में स्थित भ्रूण के लिए भी सिंथेटिक दूध बहुत हानिकारक है।

शरीर के विकास हेतु प्राकृतिक दूध में पाए जाने वाले प्राकृतिक पदार्थ का अंश मात्र भी सिंथेटिक दूध में नहीं पाया जाता है। प्राकृतिक दूध का कोई विशेष स्वाद नहीं होता है बस हल्का मीठा सा जरूर लगता है।


गाय, भैंस, भेड़ या बकरी आदि से प्राप्त प्राकृतिक दूध का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है यदि इन पशुओं को अधिक दूध की प्राप्ति के लिए ऑक्सीटोसिन का इंजेक्शन नहीं दिया गया हो अन्यथा यह दूध भी कई बीमारियां पैदा कर सकता है।

सोच-समझ कर विवेक से दूध की खरीदी व प्रयोग निश्चित किया जाना चाहिए।

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