जल कैसा पीना चाहिए? गर्म पानी, ठण्डा पानी या गुनगुना पानी-
गर्म पानी पीना चाहिए? ठण्डा पानी पीना चाहिए या गुनगुना पानी पीना चाहिए? इस बात को भलीं प्रकार समझ कर ही पानी का पर्याप्त मात्रा में प्रयोग किया जाना चाहिए।

यह बात अच्छी तरह से जान लें कि पानी चाहे ठण्डा पीजिए या गर्म पीजिए, शरीर अपने तापमान के अनुसार अनुकूल बनाने के लिए दोनों ही स्थिति में अतिरिक्त कैलोरी ऊर्जा खर्च कर देता है।
वजन कम करने के इच्छुक या मोटे लोगों को पतला होने के लिए अर्थात् अतिरिक्त चर्बी को जलाने के लिए ठण्डा या गर्म पानी पीना चाहिए।

सामान्य वजन वाले लोगों को सामान्य तापमान या गुनगुना पानी पीना चाहिए।

पानी कम पीया जाए? या ज्यादा पीया जाए?
पानी भी संतुलित रूप से पर्याप्त मात्रा में जरूर पीना चाहिए। दिमाग, बौद्धिक क्षमता, शारीरिक व
मानसिक सक्रियता, अभिवृत्ति, रक्तचाप नियंत्रण और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए पानी की पर्याप्त मात्रा शरीर में बनाए रखनी चाहिए। पानी पीने में कटौती व आलस्य बिल्कुल ठीक नहीं हैं
पानी की कमी रखने पर पेशाब में जलन, मूत्र नली का संक्रमण, गुर्दा रोग,पथरी, संक्रमण, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, मानसिक तनाव, क्रोध, सिर दर्द, घबराहट, चिड़चिड़ापन, कब्ज, मुँह में बदबू, पायरिया व शारीरिक व्याधियां पकड़ लेती है।
शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बहुत अधिक पसीना बहने, डायरिया (दस्त) या उल्टी के कारण डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। पानी की कमी से बहुत अधिक प्यास लगती है, मितली, उल्टी, थकान व कमजोरी की अनुभूति होती है।
प्यास लगने का इंतजार नहीं करना चाहिए। प्यास लगें इससे पहले ही पानी का ग्लास उठा कर पी लेना चाहिएं। प्यास लगना ही शरीर में डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है।

जल कैसा पीना चाहिए-बहुत अधिक पानी पीने से भी बचना चाहिए अर्थात् अधिक पानी की मात्रा शरीर में दिल, गुर्दे, यकृत तथा अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के कार्यकलाप में बाधा डाल देता है और शारीरिक संचालन क्रिया अस्त-व्यस्त हो जाती है। बिना आवश्यकता के जबरदस्ती अधिक पानी पीना मस्तिष्क की सक्रियता को विपरीत रूप से प्रभावित करके अनावश्यक रूप से कोशिकाओं में तनाव बढ़ा देता है।
इसलिए पानी संतुलित मात्रा में पर्याप्त रूप से पीना चाहिए, ना कम पानी पीएं और ना ही अधिक पानी पीएं।
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