योग निद्रा करें चिंता नहीं। Do yoga nidra – don’t worry…..

योग निद्रा करें चिंता नहीं-

प्री-मेडीटेशन बनाम् कायोत्सर्ग बनाम् योग निद्रा पहले मन को स्वस्थ रखें।

सरस जिंदगी का आनन्द लेने के लिए तटस्थ और निश्चित होकर जीए। जीवन और तनाव आज पर्यायवाची बन गए है।

कायोत्सर्ग अथवा योग निद्रा बहुमुखी विश्राम देती है अर्थात् मांसपेशियों और नाड़ियों के विश्राम के साथ में मानसिक, भावनात्मक और वैारिक विश्राम भी देती है। यह शक्तिशाली प्रयोग है जिसमें शारीरिक व मानसिक पूर्ण विश्राम मिलता है।

एकाग्रता व याददाश्त में कमी होने पर कायोत्सर्ग अथवा योग निद्रा का अभ्यास बुद्धि बढ़ाने के लिए रामबाण है।

30 मिनट का प्रयोग आपको खुशहाल रख सकता है। जिन लोगों को रात को नींद नहीं आती या उच्च रक्तचाप रहता है, इन लोगों को इसका अभ्यास बहुत ही आश्चर्यजनक लाभ देता है।

यदि जल्दी मरने का प्रोग्राम हो तो खूब चिंता कीजिए। दूसरों की कमी ढूंढ़िए और खुद कुछ मत करिए तब यह अभ्यास सिवाय चिंता व तनाव के कुछ नहीं देगा।

सात-आठ घंटे सोने के बाद भी शरीर व मन बोझिल, थकान व मन चिड़चिड़ा महसूस होना शरीर में तनाव का लक्षण है।

स्पांडलाईटिस, जुकाम, सिर दर्द, अम्लता व खट्टी डकारंे आदि मन का तनाव का परिणाम है। 80 प्रतिशत रोग मन से ही शरीर में आते हैं।

चिंता व तनाव में बंधकर जीने की आदत से मुक्त होना ही अच्छा है। जिंदगी का सुख भूलकर जी तो लेंगे लेकिन उम्र कम हो जाती है।

आपसी रिश्तों में तनाव, बीमारियां व असंतुलित व असंयमित जीवन-शैली से घरों के माहौल बदल रहे हैं। समर्पण व त्याग का अभाव पूरी तरह दिखता है कि व्यक्ति खुद के लिए ही सोचता है किंतु स्वयं के लिए भी

सकारात्मक व समर्पण सहित अच्छा नहीं सोचता।

योग निद्रा या कायोत्सर्ग विश्राम का मंजर है। एक ऐसा विश्राम जो हम पूरी रात सोकर भी नहीं पाते हैं।

रात बिस्तर में पता नहीं कितनी कच्ची नींद आई, सपनें आएं, करवटें लेते रहते हैं, कभी गर्मी लगती है तो कभी प्यास लगती है या बार-बार मूत्र विसर्जन के लिए जाना पड़ता है। कभी-कभी थकान से शरीर इतना अकड़ जाता है कि नींद कोसों दूर चली जाती है।

बिस्तर पर जाने के बाद भी ओवर थिंकिंग की पिक्चर चलती रहती है। मन को खाली रखें।

योग निद्रा के अभ्यास में पूरी तरह होश में भी रहते हैं और गहरी नींद के लक्षण भी शरीर और मन पर प्रकट होते हैं।

योग निद्रा बैठकर नहीं लेट कर की जाती है इसमें सोना नहीं जगना होता है।

गहरी नींद और ग्रंथियों के अच्छे स्राव सब कायोत्सर्ग और योग निद्रा से संतुलित हो जाते हैं और शरीर स्वयं अच्छे रसों का निर्माण करने लगता है। जब स्राव ठीक ढंग से शरीर में स्रावित नहीं होते है तब रोग लगने शुरू हो जाते हैं।

जब तक दिमाग ठीक नहीं करोगे तब तो बार-बार गोली ही खानी पड़ेगी। अगर आपको अपने जीवन, मन और अच्छे स्वास्थ्य से प्रेम हो तो किसी उम्मीद नहीं रखें और योग निद्रा करें। जिंदगी को एक अनुशासन और एक नियम के साथ जीना चाहिए। योग निद्रा करें चिंता नहीं।

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