प्रौढ़ावस्था व वृद्धावस्था में आहार कैसा खाया जाएं? What kind of diet should be eaten in adulthood and old age?

प्रौढ़ावस्था व वृद्धावस्था में आहार कैसा खाया जाएं-

प्रोढ़ावस्था व वृद्धावस्था में शारीरिक संरचना व कार्य क्षमता तथा स्थिति के आधार पर ऊर्जा की आवश्यकता में कमी आ जाती है। विशेषतः पाचन तंत्र में परिवर्तन अधिक होने लगता है।

प्रोटीन, लौह तत्त्व, विटामिन बी व अन्य खनिज लवण की आवश्यकता में कमी नहीं होनी चाहिए बल्कि यह सभी पर्याप्त रूप से आहार में शामिल करते रहना चाहिए।

प्रौढ़ावस्था व वृद्धावस्था में कोशिकाओं और उत्तकों में टूट-फूट अधिक होने से मरम्मत की आवश्यकता अधिक रहती है इस कार्य में प्रोटीन व खनिज लवण बहुत अधिक सहायक होते है इनमें कटौती नहीं की जानी चाहिए।

प्रौढ़ावस्था व वृद्धावस्था में हड्डियां कमजोर होने लगती है। अस्थिभंगुरता अथवा अस्थिसुषिरता की संभावना बढ़ जाती है। इन सबसे बचने के लिए आहार में कैल्शियम अधिक मात्रा में ग्रहण किया जाना चाहिए जिससे अधिकतम कैल्शियम शरीर में अवशोषित हो सकें।

दोपहर और रात्रि का भोजन में पहले ही यह निश्चित व व्यवस्थित कर लें कि दिन भर की आवश्यक कुल कैलोरी का 1/3 भाग इन दोनों आहार में प्रत्येक में शामिल हो जाएं।

प्रौढ़ावस्था तक तो ठीक है किंतु वृद्धावस्था में दांत व मसूड़े आदि हिलने लगते है। खाद्य पदार्थों को काटने व चबाने में मुश्किल आ जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए नरम, पके हुए, मसले हुए और बारीक-बारीक कटे हुए आहार का सेवन किया जाना चाहिए। बीज व छिलकों का सेवन करने से पहले बारीक कूट कर कद्दू कस करके प्रयोग किया जाना चाहिए।

धीरे-धीरे इस उम्र में स्वाद ग्रंथियां कमजोर पड़ने से स्वाद के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है। खाया जाने वाला आहार इस प्रकार हो कि यह देखने में आकर्षक, लुभावना व पसंदीदा हो। रचनात्मकता के साथ भोजन को विभिन्न रंगों वाला भी बनाया जा सकता है। अधिक घी, वसा, तले-भुने पदार्थ, मिठाईयां,

बहुत फीका या तेज मसालेदार गरिष्ठ भोजन से बचना चाहिए।

शरीर में रोगों का आक्रमण व संक्रमण से बचाव तथा शरीर के समुचित संचालन के लिए प्रौढ़ावस्था और

वृद्धावस्था में हरी सब्जियों व फलों का भरपूर प्रयोग किया जाना चाहिए क्योंकि ये सुपाचक होते है अर्थात् जल्दी ही आसानी से पच जाते हैं।

सुबह, ष्शाम तथा दोपहर को खाए जाने वाले भोजन की मात्रा कुछ कम कर देनी चाहिए जिससे अपच, भारीपन, पेट दर्द व गैस आदि की समस्या से बचा जा सकें।

पाचन तंत्र की कमजोरी रहने से इस अवस्था में कब्ज की समस्या बहुत साधारण सी बात हो जाती है इससे बचने के लिए आहार में पर्याप्त रूप से रेशेदार व तरल खाद्य पदार्थों को प्रथमः चुनना चाहिए।

प्रौढ़ावस्था व वृद्धावस्था में पर्याप्त मात्रा में दिन भर में कम से कम 7-8 ग्लास पानी तो जरूर पीना चाहिए। इसके अतिरिक्त फलों का रस, छाछ, सूप या सब्जियों का सार भी पीया जाना चाहिए।

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