कैंडीडा एल्बिकस क्या है-70 से 80 प्रतिशत महिलाओं को इस समस्या का सामना कभी न कभी जरूर करना पड़ता है। यीस्ट फंगस को कैंडीडा एल्बिकस कहा जाता है। यीस्ट फंगस आंतों में पाचन क्रिया में मदद करते है लेकिन जब इनकी अधिकता हो जाती है या ये बेकाबू हो जाते है तब यह यीस्ट फंगस आंतों में मौजूद अच्छे व हितैषी बैक्टिरिया (लैक्टोबेसिलाई) का नाश कर डालते हैं।
कैंडीडा एल्बिकस के क्या कारण हो सकते है?
मुख्यतः हार्मोन्स स्राव का उतार-चढ़ाव।

मासिक धर्म के प्रारम्भ से पूर्व।
गर्भ निरोधक गोलियों के इस्तेमाल से योनि में एसिड की मात्रा घट जाती है और पीएच लेवल बढ़ जाने से शरीर के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया का गायब हो जाना जिससे यीस्ट की संख्या तीव्र गति से बढ़ना।
एंटीबॉयोटिक औषद्यियां, डिटर्जेंट्स, डीओ, गीले व नम कपड़े पहनना, आईयूडी एवं तंग कपड़े जींस आदि कारण।

पुरूषों के लिंग पर यीस्ट और मुँह में कैंडिडा फंगस होने के कारण महिलाओं को यीस्ट संक्रमण का खतरा बढ़ना।
उपचार
नीम के पानी का कटि स्नान एवं नीम का डूश लेना हितकर है।
महिलाओं को चाहिए कि बार-बार तकलीफ होने पर पति को उपचार व जाँच के लिए चिकित्सक से परामर्श लें।
स्पर्मिसाईड फ्री कंडोम का प्रयोग करें।
जननांग व आस-पास के क्षेत्र को भलीं-भांति सुखाएं।
संक्रमण से बचने के लिए नीम का तेल का प्रयोग करें।
ग्लिसरीन युक्त साबुन का प्रयोग करना अच्छा है।
अन्तःवस्त्र गीले नहीं रहने दें।
डीओ, परफ्यूम या एंटीसेप्टिक औषद्यी का प्रयोग संभल कर करें।
अन्तः वस्त्र सूती ही पहने सिंथेटिक या रेशम आदि से दूर रहें।
कपड़े तंग नहीं पहन कर बिल्कुल ढ़ीले-ढ़ाले पहनें।
दही, लाल मिर्च, केला व लहसुन आदि से यीस्ट की रोकथाम में सहायता मिल सकती है।
स्वच्छता अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रथम कदम होना चाहिए।

कैंडीडा एल्बिकस क्या है? हम जान गए है, आहार-विहार और जीवन-शैली संतुलित रखना स्वयं को स्वस्थ रखने का अच्छा उपचार है।
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