आटोफागी व शरीर कैसे काम करता है Autophagy and how the body works

आटोफागी व शरीर कैसे काम करता है-ऑटो व फैगी दो शब्दों से बना ऑटोफागी का मतलब है स्वयं को खाना। उपवास के दौरान कोशिकाएं शरीर की टूटी-फूटी, क्षतिग्रस्त व खराब कोशिकाओं को स्वयं ही खत्म करने लगती है और पोषक तत्त्वों के अभाव से शरीर को ऊर्जावान रखने में सहायता करती है।

उपवास के प्रभाव से नई कोशिकाओं का निर्माण शरीर में होने लगता है। उपवास करने से आयु बढ़ती है अर्थात् उम्र बढ़ने की गति धीमी होती है।

उपवास करने से कई जटिल बीमारियां दूर होती है। अच्छा स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए बहुत लाभदायक है।

सप्ताह में एक दिन उपवास करने से शरीर तीव्र गति से कोशिकाओं का पुनर्निमाण करता है।
उपवास के दौरान शरीर से विष जन्य पदार्थ बाहर निकलते है।

उपवास कर लेने शरीर में एंटीआक्सीडेंटस सक्रिय होते हैं। शरीर के अंगों को विश्राम मिलता है।


उपवास के दौरान जब शरीर की कोशिकाएं टूटी-फूटी, क्षतिग्रस्त, रोग ग्रस्त व खराब कोशिकाओं को स्वयं खाने का कार्य करती है उस समय मस्तिष्क अधिक सक्रिय हो जाता है तनाव की स्थिति कम हो जाती है और हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा करने में मदद करती है। स्थिति इसके विपरीत होने पर पार्किन्सन, मधुमेह एवं पाचन तंत्र संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

शरीर के दोष, धातु, व मल में संतुलन सप्ताह में एक दिन उपवास करते रहने से बना रह सकता है।

आटोफागी व शरीर कैसे काम करता है-उपवास करने से त्रिदोष (वात, पित्त, कफ), और मानसिक दोष (रज व तम) आदि संतुलित रहते है।

सात धातुएं रस, खून, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा व शुक्र सामान्य रूप से कार्य करते है।
मल, मूत्र व पसीना में संतुलन बना रहता है।

दूषित व गलत आहार-विहार और जीवनशैली के कारण मोटापा बढ़ता है और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बन जाता है जिससे फैटी लिवर, उच्च रक्तचाप, निम्न श्रेणी का कॉलेस्ट्राल, हाईपर टेंशन, माइक्रो वैस्कुलर व हृदय संबंधी रोग आदि अनेक रोग पैदा होने की संभावनाएं बढ़ जाती है।

सुबह जागने के दो घंटे के भीतर नाश्ता जरूर कर लेना चाहिए। नियमित व संतुलित दिनचर्या तथा खानपान का स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

खाए हुआ भोजन यदि पूरी तरह पचे नहीं और भोजन बार-बार कर लिया जाए तो शरीर में ग्लूकोज, एमीनोएसिड, ट्राईग्लीसराईड व अन्य रस आदि पर्याप्त मात्रा में नहीं बन पाते और ग्रहण किया गया भोजन विषजन्य रूप से कार्य करने लगता है। एक भोजन पचने के बाद ही दूसरा भोजन ग्रहण करना श्रेयकर है।आटोफागी व शरीर कैसे काम करता है यह हम जान गए है।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*