विटामिन डी व कैल्शियम अवसाद को आसानी से दूर कर देते हैं .
यदि शरीर को पर्याप्त पोषक तत्त्व नहीं मिलते हैं तो दुख, तनाव व निराशा आ घेरती है और अवसाद का कारण बन पड़ता है।
लक्ष्य प्राप्ति और कार्य की पूर्णता के लिए चिंता आवश्यक है किंतु चिंता का दबाव निरंतर बना रहें और आदत बन जाए तो धीरे-धीरे मानसिक तौर पर समस्याएं प्रकट होने लगती है और अवसाद की स्थिति आ घेरती है।

अवसाद बहुत प्रकार व भिन्न-भिन्न स्तर का हो सकता है। अवसाद आनुवांशिक व दूषित जीवन-शैली व आहार-विहार के कारण भी प्रकट हो सकता है।
अवसाद से बचने के लिए साधारण उपाय-
विटामिन डी और कैल्शियम-शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी होने के कारण अवसाद की स्थिति प्रकट हो जाती है। सामान्यतः जो लोग अधिक समय तक उदास, चिंतित और अवसाद में रहते हैं उनके शरीर में विटामिन डी की कमी पाई जाती है।

विटामिन डी कैल्शियम का अवशोषण कर हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायता करने के साथ मस्तिष्क की कार्यक्षमता और विकास को बढ़ाने वाले जीन को सक्रिय करता है।
सर्दियों में जब शरीर को विटामिन डी शरीर को पूर्ण रूप से नहीं मिल पाता है तब कैल्शियम भी शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता है और इन दोनों की कमी शरीर में हो जाने पर अवसाद की स्थिति बिगड़ जाती है।
सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणें विटामिन डी का निर्माण शरीर में करती है। रोज कुछ समय जरूर धूप में बिताना चाहिए। विटामिन डी शरीर में संरक्षित हो जाता है और शरीर की आवश्यकता को पूरी करता है। शरीर में विटामिन डी रहेगा तो कैल्शियम की कमी भी नहीं हो पाती है।

क्या खाएं?

विटामिन डी व कैल्शियम – संतरा, गाजर, दूध, मक्खन, मशरूम व कॉड लिवर का सेवन करते रहने से विटामिन डी का संतुलन बना रहता है और बाजरा, मूंग, रागी, मोठ, चना, गेहूँ, राजमा, सोयाबीन, अरबी, मूली, मेथी, करेला, टमाटर, ककड़ी, गाजर, भिंडी, चुकंदर, अनानास, आम, संतरा, नारीयल, दूध व दूध से बने पदार्थ आदि में कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जिन्हें संतुलित रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है।
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