शहद स्वयं पचा हुआ पोषक आहार है, शहद स्वयं में एक एंटीबायोटिक है जो संक्रमण की रोकथाम में सहायक होता है।
शहद में कैल्शियम, लोह तत्त्व, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, सोडियम व पोटेशियम व जिंक आदि पर्याप्त मात्रा में पाए जाते है।
शुद्ध शहद का प्रयोग पाचन शक्ति को मजबूती प्रदान करता है।

शहद को आंतों द्वारा पचाने की जरूरत नहीं होती है बल्कि इसके प्रयोग से शरीर को तुंरत ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
त्वचा का कटना, फटना व घावों को भरने में शहद बहुत उपयोगी होता है।
मधुमक्खियों द्वारा अलग-अलग पेड़ों पर बनाए गए शहद के छत्तों से प्राप्त शहद की गुणवत्ता भिन्न-भिन्न होती है।
कमल के फूलों का शहद सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
उल्टी की समस्या होने पर पुदीना व शहद प्रत्येक एक चम्मच की मात्रा सेवन करने से लाभ होता है।
कब्ज की समस्या होने पर एक कप टमाटर का रस में एक चम्मच शहद का सेवन लाभकारी है।
संक्रमण का प्रभाव कम करने के लिए एक ग्लास गुनगने पानी में एक चुटकी दाल चीनी व एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर से गंदगी बाहर निकलने लगती है और संक्रमण का प्रभाव समाप्त होने लगता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

खाँसी-जुकाम की स्थिति होने पर अदरक का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।
उच्च रक्तचाप की स्थिति में शहद व प्याज का रस प्रत्येक की एक चम्मच प्रातः भूखे पेट सेवन करने से रक्तचाप सामान्य रहने लगता है।

शहद स्वयं पचा हुआ पोषक आहार है लेकिन शहद के सेवन में कुछ सावधानियां जरूर बरतें
पित्त प्रकृति के लोगों को शहद के सेवन से बचना चाहिए।
कभी भी बहुत गर्म पानी व दूध में शहद मिलाकर सेवन नहीं करना चाहिए।
घी के साथ शहद का सेवन नहीं करना चाहिए।
गर्म प्रकृति की खाद्य वस्तुओं के साथ शहद का सेवन नहीं करना चाहिए।
गर्मी के मौसम में शहद का सेवन करने से बचना चाहिए।
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