जानिए व्यस्कों के लिए कौन-कौन से टीके है-जन्म से दस वर्ष तक कई टीके लगवाने की सलाह चिकित्सक द्वारा दी जाती है। टीकों से बीमारियों से बचाव होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। कई टीके ऐसे भी होते है जिन्हें व्यस्क होने पर भी चिकित्सक की सलाह से लगवाए जा सकते है और रोगों से दूर रहा जा सकता है। मधुमेह रोगियों को चिकित्सक की सलाह पर ही टीकाकरण करवाना चाहिए। यदि गलती से कोई टीका दुबारा लग भी जाता है तो स्वास्थ्य पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता है।

इन्फ्लूएंजा का टीका एक वर्ष में एक लगवाया जा सकता है। इस टीके के प्रभाव से सर्दी-जुकाम व मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है साथ ही श्वसन तंत्र मजबूत होकर रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों की भी रोकथाम करता है।

टीडेप अर्थात् टिटनेस, डिप्थीरिया व काली खाँसी दूसरे अर्थों में पर्टुसिस का टीका बैक्टीरिया से उत्पन्न होने वाले रोगों से बचाता है। बचपन में नहीं लगा है तो दस वर्ष में एक बार टीडेप व टीडी का बूस्टर डोज लगवाया जा सकता है।
रिकॉम्बिनेंट जोस्टर का टीका त्वचा पर पानी भरे हुए दाने निकलने से रोकने के लिए लगवाया जा सकता है। इस रोग को हरपीज जोस्टर भी कहा जाता है। इसकी चिकित्सक के दिशानिर्देश में दो खुराक ली जाती है। हरपीज जोस्टर चिकनपॉक्स फैलाने वाले विषाणु वेरीसेला जोस्टर द्वारा ही फैलती है।
चिकनपॉक्स वेरीसेला की दो खुराक लेनी होती है यह चिकनपॉक्स (माता) से बचाव करता है। एक खुराक लेने के 4-8 सप्ताह के बाद दूसरी खुराक लेनी चाहिए फिर दुबारा लेने की आवश्यकता नही होती है।

हेपेटाईटिस ए और बी का टीका लीवर की घातक और गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। इस टीके की दो या तीन खुराक चिकित्सक के निर्देश में दी जाती है। इस टीके का प्रभाव दस वर्ष तक रहता है। जानिए व्यस्कों के लिए चिकित्सक के मार्गदर्शन में बूस्टर डोज भी ली जा सकती है।

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