छरहरा बनना आपकी मुट्ठी में हैं! जानिए कैसे-आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ का संतुलन अच्छे स्वास्थ्य का सूचक है।
वात श्रेणी वाले व्यक्ति पतले-दुबले, स्वभाव में तेजी, रूखापन और बदलने वाला होता है।
इस श्रेणी के लोगों की त्वचा शुष्क, दिमाग तेजी से काम करने वाला और भावनाएं तीव्र गति से बदलने वाली होती है। वात प्रकृति के व्यक्ति जल्दी सीखते है तो जल्दी भूलते भी है।
वात श्रेणी के लोगों को गर्म, भारी और चिकनाई युक्त चीजें पर्याप्त मात्रा में खाई जानी चाहिए। ठण्डे, सूखे और हल्के पदार्थों का सेवन कम किया जाना चाहिए।
मीठे, खट्टे और नमकीन पदार्थ, चीनी, दूध, मक्खन, चावल, ब्रेड, नीबू, पनीर आदि खाया जा सकता है।

अदरक, दालचीनी, कालीमिर्च, नमक,पालक, हरी पत्तेवाली सब्जियां, हल्दी, सिरका, गर्म मसालें व जीरा आदि मसालेदार व तलाभुना आहार बहुत कम लेना चाहिए।
कब्ज बढ़ाने वाले आहार मैदा, जंक फूड, सेम, मसूर और अनार आदि भी कम खाना चाहिए।
फूल गोभी, पत्ता गोभी, मटर व अन्य सब्जियां तेल या मक्खन डालकर पकाई जानी चाहिए।

संतरा, केला, सेब, कीवी, नाशपति और सूखे मेवे, बिना पॉलिश चावल और चोकर सहित गेहूँ का आटा खाना चाहिए। जौ, मक्का, ज्वार व बाजारा आदि कम सेवन करना चाहिए।
कफ प्रकृति के व्यक्ति मोटे होते है।
त्वचा पतली और आँखें चौड़ी व बड़ी होती है।
इस प्रकृति के व्यक्ति एक ही ढर्रे पर चलना पसंद करते है।
कार्यक्षमता बहुत कम होती है और धीरे-धीरे कार्य करते है।
कोई बात जल्दी नहीं भूलते है। खाने-पीने पर बहुत अधिक ध्यान देते है जोकि मोटापे का कारण बनता है।
कफ प्रकृति के व्यक्ति को हल्के खाद्य पदार्थ, सेब, नाशपति, मलाई निकला दूध, सूखे, मसालेदार, तीखे और गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
जौ, बाजरा और ज्वार अधिक खाया जाना चाहिए।

टमाटर, खीरा, नमक,संतरा, अन्नानास, शकरकंदी, मीठा, खट्टा और नमकीन खाद्य पदार्थों के अलावा गेहूँ का भी बहुत कम सेवन करना हितकारी है।
पित्त प्रकृति के व्यक्ति अधिक गर्मी महसूस करते हैं। तेज धूप और अधिक गर्मी से तुरंत परेशान हो जाते है।
पित्त प्रकृति के व्यक्तियों को भूख बहुत लगती है फिर भी मोटे नहीं हो पाते हैं।
दूध, मक्खन, अंगूर, चेरी, नारीयल, खरबूजा आदि मीठे फल, मछली, मुर्गा, तीतर का मांस, चापड़ सहित गेहूँ, बिना पालिश हुए चावल, जैतून, सूरजमुखी व नारीयल तेल का पर्याप्त एवं संतुलित मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए।

गर्म मसालें, अंडा, पनीर, खट्टी छाछ, दही, क्रीम, संतरा, अन्नानास, खट्टे फल, शहद, गुड़ व चीनी आदि का सेवन कम ही करना अधिक अच्छा है।
इस प्रकार वात, पित्त और कफ की शरीर की प्रकृति अनुसार अपने लिए आहार की तालिका स्वयं तैयार करके अनुपालन किया जा सकता है। बार-बार याद रखें कि संतुलित आहार व्यवस्था ही आपके स्वास्थ्य का राज है और इस प्रकार बना रहेगा आपका स्वास्थ्य आपकी मुट्ठी में और छरहरा बनना भीआपकी मुट्ठी में हैं।
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