नंगे पाँव चलने से होते है दूर रोग | Benifits of walking on green grass in morning

नंगे पाँव चलने से होते है दूर रोग –

गीली धरती या गीली दूब अर्थात् ओस से भीगी घास पर नंगे पैर चलने से एक ओर ताजगी और जीवन-शक्ति पुष्ट होती है तो दूसरी ओर खुलकर भूख लगती है, नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है, संतुलित रक्त परिसंचरण द्वारा सिरदर्द, गले की सूजन, जुकाम, उच्च रक्तचाप तथा सिर का ठंडापन रहना जैसे रोग भी दूर होने लगते है। नंगे पाँव चलिए-गीली धरती या गीली दूब अर्थात् ओस से भीगी घास पर नंगे पैर चलने से एक ओर ताजगी और जीवन-शक्ति पुष्ट होती है तो दूसरी ओर खुलकर भूख लगती है, नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है, संतुलित रक्त परिसंचरण द्वारा सिरदर्द, गले की सूजन, जुकाम, उच्च रक्तचाप तथा सिर का ठंडापन रहना जैसे रोग भी दूर होने लगते है।

स्वेद-स्नान अर्थात् व्यायाम तथा योगासन इत्यादि

व्यायाम शरीर की सफाई के साथ-साथ शरीरीय यंत्रों को सबल बनाकर शरीर संचालन सुदृढ़ बनाता है। शरीर के अन्दर गति उत्पन्न होकर उत्ताप प्रकट होता है जिसके फलस्वरूप नवीन ऊर्जा संचारित होती है। यह मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है। जिस प्रकार भूख लगने पर शारीरिक व मानसिक रूप से कोई काम नहीं किया जा सकता है, प्रथमतः शरीर को खुराक दी जाती है। ठीक इसी प्रकार व्यायाम करने की भी ऐसी पक्की आदत एवं अभ्यास कर लेना चाहिए कि इसके किए बिना कोई और दैनिक कार्य प्रारम्भ ही न हो। भोजन शरीर को इंधन प्रदान करता है तो व्यायाम शरीर के कल-पुर्जों को अच्छा बनाए रखता है।

व्यायाम के प्रभाव से श्वास का वेग बढ़ जाता है और जल्दी श्वास लेने लगते हैं जिससे शरीर को अधिक गर्मी और शक्ति प्राप्त होती है। दंड बैठक, कुश्ती, टहलना, तैरना, योग, आसन, पेट व मेरूदण्ड की क्रियाएं, बेडमिंटन, बॉलीबॉल, टेनिस, कबड्डी, घुडसवारी, दौड़ना, विभिन्न शारीरिक खेल, परम्परागत नृत्य इत्यादि अनेक तरीके हैं जिनमें से किसी को भी वायु स्नान हेतु अपनाया जा सकता है।

मुख्यतः आसन अभ्यास के साथ उसके पूरक आसनों को भी किया जाना चाहिए अन्यथा पूरा लाभ नहीं मिल पाता। रक्त-शुद्धि के लिए दो-तीन आसनों के बाद कोई विश्राम आसन जरूर करंे। आसन अभ्यास से तीन घंटा पूर्व तथा पश्चात् कुछ भोज्य पदार्थ ग्रहण किए जा सकते है तथा अभ्यास के तुरंत पश्चात् कुछ न लें। आधा घंटा पश्चात् पानी, दूध, रस व फल आदि लिया सकता है। परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों को बाल्यावस्था से ही इन सबके लिए प्रोत्साहित व आकर्षित करें और ध्यान रखें कि नंगे पाँव चलने से होते है दूर रोग |

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