स्वस्थ रहने तथा वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाएं रखने के लिए यें 6 काम रोज जरूर अच्छी तरह करने चाहिए-
1. पौष्टिक व संतुलित भोजन रोज जरूर लें-
भोजन से शरीर का निर्माण और पालन पोषण होता है जैसा आहार होगा वैसा ही शरीर व मन होगा। भोजन की गुणवत्ता के साथ सात्विक, शाकाहारी व सरलता से पचने वाला भोजन ही ग्रहण किया जाना चाहिए। सुबह जागते ही उषापान जरूर करना चाहिए। भोजन की अति व कमी नहीं होनी चाहिए। ऋतु व शरीर की प्रकृति के अनुसार भोजन करना चाहिए। दोनों समय का भोजन 32 बार चबा-चबा कर जरूर करना चाहिए। सुबह का नाश्ता 8 बजे तक अवश्य कर लेना चाहिए अथवा उठने के दो घंटे के भीतर जरूर नाश्ता कर लेना चाहिए। नाश्ते में अंकुरित अनाज, फल व रसों का सेवन प्रथमतः करना अधिक उपयोगी है।

2. गहरी नींद-
मन, मस्तिष्क और शरीर को पूरा विश्राम गहरी नींद सोने से ही मिल पाता है। लगातार नींद नहीं आने की स्थिति में पागल तक हो जाते हैं। किशोर व वृद्धों को 8 घंटे तथा युवाओं को 6 घंटे की गहरी नींद आवश्यक है। रात को समय पर सोना और सुबह समय पर जागना दिन भर चुस्त-दुरूस्त रखता है। नींद और विश्राम का सबक पशु-पक्षियों से सीखना चाहिए।

3. ब्रह्मचर्य-
मन व शरीर को काम वासना से दूर रख कर इन्द्रियों को वश में रखकर अच्छे विचार व कर्म करने से शरीर व मन स्वस्थ रहता है।
4. योग एवं व्यायाम-
शरीर के पालन-पोषण व विकास के लिए जिस प्रकार आहार की आवश्यकता होती है उसी प्रकार खाए हुए भोजन के पूरी तरह पाचन के लिए, शरीर को पुष्ट, सुडौल और शक्तिशाली बनाए रखने के लिए योग व व्यायाम नियमित करना जरूरी है। शक्ति व सामर्थ्य अनुसार योग, आसन, भ्रमण, प्राणायाम व अन्य शारीरिक क्रियाएं हर रोज जरूर की जानी चाहिए।

5. नहाना-
समताप पानी से रोज नहाना चाहिए। बालक, वृद्ध और रोगी जन को गुनगुने पानी से स्नान करना चाहिए। नहाने का सबसे अच्छा समय सूर्योदय से पहले व सूर्योदय के समय ही होता है।
दैनिक नित्य कर्म आदि के पश्चात् स्नान करने के बाद ही योग, आसन, भ्रमण, प्राणायाम व ध्यान आदि किया जाना चाहिए।

6. ध्यान-
दैनिक नित्य कर्म, स्नान, योग, आसन, प्राणायाम व भ्रमण के बाद घर या बगीचा के एकांत स्थान में बैठकर कम से कम 15 मिनट ध्यान का अभ्यास जरूर करना चाहिए। ईश्वर स्मरण, मंत्रोच्चार, ईष्टदेव की उपासना करने से मनोबल, आत्मबल और चरित्र बल बढ़ता है। परम शक्ति, चैतन्य व आनन्द का अनुभव होता है। ध्यान के प्रभाव से आत्म विश्वास में चमत्कारी वृद्धि होती है। ध्यान के साथ दिन का प्रारम्भ करने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ अच्छा व्यतीत होता है।

स्वस्थ रहने तथा वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाएं रखने के लिए हर रोज यें 6 काम जरूर अच्छी तरह करने चाहिए-
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