सीपीआर क्या है और कैसे दी जानी चाहिए -कार्डियक अरेस्ट हृदय में होने वाली इलोक्टॉनिक गड़बड़ियों के कारण होता है। हृदय का एक हिस्से से इंपल्स का निर्माण होता है। यह शरीर में एक प्रकार का इलेक्ट्रानिक करंट पैदा करता है जोकि हृदय की मांसपेशियों तक जाता है जिसके कारण हृदय लगातार पंप करता है और धड़कन चलती रहती है।
इलेक्टॉनिक करंट बंद हो जाने से हृदय काम करना बंद कर देता है। हृदय पंप नहीं कर पाने या इस क्रिया में देरी या विघ्न होने से ष्शरीर के अन्य मुख्य अंगों तक खून नहीं पहुँत पाता है जिसके कारण दिमाग तक खून व ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है और हृदय काम नहीं कर पाता है और रोगी बेहोश हो जाता है। यदि सही समय पर उपचार नहीं मिलें तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

यदि रोगी बेहोश हो जाए तो उसे (कार्डियो पल्मोनरी रेसूसिटेशन) विधि द्वारा होश में लाया जाता है।
रोगी के बेहोश हो जाने पर उसे खुले हवादार स्थान पर ले जाएं और रोगी के कपड़े ढ़ीले कर दें।
गले में कण्ठ के दोनों ओर गले की नब्ज होती है जिसे कैरॉटिड पल्स कहते हैं। बेहोश होने पर कैरॉटिड नब्ज की जांच तीन अंगुलियों की सहायता से नब्ज टटोल कर की जा सकती है।
सीने के बीच की हड्डी का आखिरी हिस्सा जिसे स्टर्नम कहा जाता है, यहाँ 100 से 120 तक तेज गति से कंप्रेशन दें।

रोगी के सिर पर हथेली रखें और अंगूठे व तर्जनी अंगुली (अंगूठे के पास वाली अंगुली) से नाक दबाएं और रोगी के मुँह पर साफ कपड़ा रख कर मुँह से सामान्य रूप से कृत्रिम श्वास दें।
30 कंप्रेशन के बाद रोगी के मुँह में हवा फूंकें। यह क्रिया एक सैंकण्ड के अंतराल पर पाँच बार तक करें।
30 कंप्रेशन के बाद रोगी के हृदय की धड़कन की जांच करें।

यदि अब भी रोगी के हृदय की धड़कन शुरू नहीं हो तब तुरंत बिना विलम्ब किए नजदीकी हॉस्पिटल में चिकित्सा के लिए ले जाएं। सीपीआर क्या है और कैसे दी जानी चाहिए इसकी जानकारी होनी चाहिए जिससे समय रहते किसी की जान बचाई जा सकती है।
Leave a Reply