कार्डियक अरेस्ट क्या है?
कार्डियक अरेस्ट हृदय में होने वाली इलोक्टॉनिक गड़बड़ियों के कारण होता है। हृदय का एक हिस्से से इंपल्स का निर्माण होता है। यह शरीर में एक प्रकार का इलेक्ट्रानिक करंट पैदा करता है जोकि हृदय की मांसपेशियों तक जाता है जिसके कारण हृदय लगातार पंप करता है और धड़कन चलती रहती है।

इलेक्टॉनिक करंट बंद हो जाने से हृदय काम करना बंद कर देता है। हृदय पंप नहीं कर पाने या इस क्रिया में देरी या विघ्न होने से शरीर के अन्य मुख्य अंगों तक खून नहीं पहुँत पाता है जिसके कारण दिमाग तक खून व ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती है और हृदय काम नहीं कर पाता है और रोगी बेहोश हो जाता है। यदि सही समय पर उपचार नहीं मिलें तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण क्या है?
रक्तचाप का कम होना और पसीना आना।
सांस फूलना और सीने में दर्द होना।
चक्कर आना और शरीर का पीला पड़ना।
हृदय के बाईं ओर तेज दर्द होना और बैचेनी के साथ धड़कन अनियंत्रित होना।
आंखों के आगे अंधेरा आना और अचानक सिर दर्द का बढ़ना।
उल्टी या मितली जैसा अनुभव होना।
कार्डियक अरेस्ट का मुख्य कारण क्या है?
कार्डियक अरेस्ट का मुख्य कारण फास्ट फुड और असंतुलित और निष्क्रिय जीवन-शैली है।
देर रात तक जागना, धूम्रपान, नशा व देर रात्रि तक भोजन करने की आदतों से कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।
तनाव की स्थिति नियमित रहने से हृदय रोग बढ़ जाता है।
बटर, चीज, म्योनीज, बर्गर, जंकफुड व अन्य बाजारी खाद्य पदार्थों में सेचुरेटेड फेट अधिक मात्रा में पाया जाता है। सेचुरेटेड फेट कमरे के तापमान में भी पिघलता नहीं है। यह धमनियों में ब्लॉकेज का कारण बनता है।
शरीर के लिए जितना भोजन आवश्यक है उतना ही व्यायाम, योग व अन्य शारीरिक गतिविधियां भी आवश्यक है। आलस्य, एक ही स्थान पर लम्बे समय तक बैठे रहना और कोई भी शारीरिक मेहनत नहीं करने से शरीर में फेट (वसा) का जमाव होने लगता है।
मोनोपॉज के बाद कार्डियक अरेस्ट का खतरा महिलाओं में बढ़ जाता है क्योंकि पिरीयडस (मासिक धर्म) के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन्स का निर्माण शरीर में होता है जो हृदय रोगों से बचाव करता है किंतु मोनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन बनना बंद हो जाता है और महिलाओं में कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है।
कार्डियक अरेस्ट से बचने के लिए क्या करें?
रोज 80 मिनट पैदल चलना चाहिए।
मोटापा व चर्बी नहीं बढ़े इसके लिए सतर्क रहें और ध्यान रखें कि कमर का घेरा 80 सेंटीमिटर से अधिक नहीं हो।
भ्रमण करते समय एक मिनट में 80 कदम चलने की गति रखें।

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में रोगी की छाती को एक मिनट में कम से कम 100 से 120 तक दबाएं।
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