हर्ड इम्यूनिटी – हरपीज जोस्टर क्या है-वायरस और बैक्टीरिया की चपेट में भी आना जरूरी है क्योंकि इसके बाद इम्यूनिटी उसी अनुरूप डवलप भी हो जाती है। इसे हर्ड इम्यूनिटी कहा जाता है।

कुछ वर्षों से संयुक्त परिवार के स्थान पर एकल परिवार की परम्परा का चलन बढ़ा है। घर के अधिक सदस्यों या संयुक्त परिवार में रहने वाले बच्चों में बीमारियां जल्दी उत्पन्न हो जाती थी और बच्चे बीमारियों को झेल कर फिर इम्यूनिटी भी विकसित कर लेते थे किंतु अब स्थिति बदल सी गई है।
बढ़ते एकल व छोटा परिवार की परम्परा के चलते बच्चे घर के सदस्यों एवं संयुक्त परिवार की नजदीकियों से दूर होते चले हैं। इम्यूनिटी डवलप नहीं हो पाने के कारण बचपन की बीमारियां अब किशोर, युवा, प्रोढ़ व वृद्धावस्था की आयु में भी पनप रही है।
माता-पिता द्वारा बच्चों का टीकाकरण करवाने के बावजूद चिकनपोक्स, डिप्थीरिया व मम्स जैसी बीमारियां जोकि बचपन में होती है, इन्हीं बीमारियों का प्रकोप अब किशोर, युवा व वृद्धों को भी प्रभावित कर रहा है।

बचाव के लिए माता-पिता को चाहिए कि चिकित्सक द्वारा बच्चों के लिए प्रस्तावित सभी टीकें जैसेकि बूस्टर आदि टीके बच्चों को समय-समय पर पूर्ण रूप से समयावधि में निश्चित तौर पर लगवा लेने चाहिए।
बचपन में बीमारी होने पर टीका लगवा कर सुरक्षित तो हो जाते हैं किंतु आगे बूस्टर डोज आदि का टीकाकरण के अभाव में भविष्य में वायरस व बैक्टीरिया पुनः सक्रिय होकर रोग ग्रस्त कर देते हैं क्योंकि उदाहरण के लिए चिकनपोक्स के वायरस 40 से 50 वर्षों तक सुप्त अवस्था में पड़े रहते है जोकि अपना स्ट्रेन नहीं बदलते है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होते ही यह पुनः सक्रिय हो जाते है और रोग ग्रस्त कर देते हैं। वृद्धावस्था में इन बीमारियों का पुनः प्रकट होना हरपीज जोस्टर कहलाता हे।

यह जान लेना आवश्यक है कि टीकाकरण (वैक्सीन) आदि की एक सीमा होती है। एक अवधि के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आने लगती है। यदि आप चाहते है कि बचपन में उत्पन्न होने वाली बीमारियां बच्चों को भविष्य में नहीं हो तो इसके लिए समय-समय पर पूर्ण टीकाकरण बहुत आवश्यक है। हर्ड इम्यूनिटी – हरपीज जोस्टर के बारे में जानकारी रखनी आवश्यक है।
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