बरसात के मौसम में किसी भी स्थान का पानी पीना ठीक नहीं है। साफ और ष्शुद्ध पानी नहीं मिल पाने की स्थिति में यदि बहुत तेज प्यास लग रही हो तो एक कप चाय ठण्डी करके पी लें किंतु गंदा पानी पीने से बचाव करें। गंदा पानी पीने से पीलिया, अतिसार व हैजा आदि हो सकता है।

बरसाती मौसम में नदी, तालाब आदि में नहाना आदि नहीं करें। अनजान जगह या स्थान के जलाशय आदि में नहीं कदें। तेज बारीश व बाढ़ आदि की स्थिति में पानी में नहीं उतरना चाहिए।

स्वीमिंग पुल आदि आदि में अधिक समय तक तैरने से बचें।
बरसात में भीगने के बाद शरीर को तौलिए से अच्छी तरह पौंछ कर सूखे व स्वच्छ कपड़े तुरंत पहन लेने चाहिए क्योंकि अधिक देर तक गीले कपड़े पहने रहने पर त्वचा में संक्रमण, दाद, खुजली या फोड़े व फुंसी होने का भय रहता है।
बारीश के मौसम में बाहर निकल कर पैदल चलना ही पड़े तो छाता, टार्च व एक डंडा भी सुरक्षा की दृष्टि से रख लेना चाहिए।

बरसात का पानी के वाष्पीकरण से वातावरण में परिवर्तन होता है जिसके प्रभाव के कारण पाक स्थली में अम्ल का संचय होने लगता है और पाचक अग्नि मंद व दुर्बल होने लगती है जिसके परिणाम स्वरूप वात दोष का प्रकोप हो जाता है। इस ऋतु में पित्त का संचय होता है, कफ शांत रहता है और वात का प्रकोप बढ़ जाता है।
बरसात के मौसम में क्या और कैसा खाना चाहिए?
बरसात के मौसम में आहार की मात्रा पाचन शक्ति के अनुसार ही होनी चाहिए अर्थात् ग्रहण किया गया आहार ठीक प्रकार से सही समय में पच जाए उतना ही आहार खाना चाहिए। बरसात के मौसम में आहार हल्का, ताजा व सुपाच्य वाला होना चाहिए।
अम्ल, मधुर, लवण और स्निग्ध प्रकृति वाले आहार का सेवन करने से वात का नाश होता है।

वर्षा ऋतु में आहार का समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए। वर्षा के शुरूआती दिनों में दूध तथा वर्षा के अंतिम दिनों में छाछ का सेवन नहीं किया जाना चाहिए।
बरसात के मौसम में भोजन हल्का, जल्दी पचने वाला और ताजा होना चाहिए।

इस मौसम में रात्रि भोजन 8 बजे से पहले कर लेना अति उत्तम है।
पीने के पानी में चने के बराबर फिटकीरी पीस कर डाल देने से कुछ ही समय में पानी में स्थित कचरा व मिट्टी बर्तन के पैंदे में बैठ जाता है। तुलसी के पत्ते पानी के बर्तन में डाल देने से भी पानी ष्शुद्ध हो जाता है।
ताजा रोटी, सब्जियां, मूंग की दाल, लौकी, तुरई, आलू, टमाटर, परवल, आम, जामुन, आलू बुखारा, भुट्टा, आदि सब्जियां पर्याप्त मात्रा में ग्रहण करनी चाहिए।

भुट्टा खाने के बाद छाछ पीने से भुट्टा जल्दी हजम हो जाता है।
बरसात के मौसम में बासी आहार, बासा भोजन, तले-भुने पदार्थ, बैंगन, फूल गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, व ठण्ड प्रकृति के आहार नहीं खाने चाहिए। सावन में दूध और भादवे में छाछ का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। रात में दही का सेवन नहीं करना चाहिए। बरसात के मौसम में बड़ी हरड़ व सैंधा नमक समान मात्रा में साधारण पानी के साथ सुबह-शाम लेना हितकारी है।
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