पूरी नींद नहीं लेने के कारण 40 की उम्र में होने वाला टाईप-2 मधुमेह रोग अब 18-30 साल के युवाओं में पसरने लगा है। 15 प्रतिशत से अधिक युवा मधुमेह की चपेट में हैं।
देर रात तक मोबाईल व लेपटाप पर लगे रहने और लगातार चेटिंग करने की लत अथवा आदत युवा वर्ग की नींद उड़ा रहा है अर्थात् नींद का सर्कल खराब कर रहा है।
युवा वर्ग रात को दो बजे तक मोबाईल पर चेटिंग के लिए जाग रहा है और देर रात तक जागने से कार्टिसोल हार्मोन, लेप्टिजम और अन्य हार्मोन्स बुरी तरह प्रभावित होते हैं और असंतुलित हो जाते हैं जिससे शरीर में गलूकोज का मोटाबोलिज्म एबनॉर्मल हो जाता है और डायबीटीज होने की संभावना प्रबल हो जाती है।

देर रात तक मोबाईल या लेपटाप पर चिपके रहने से पेनक्रियाज की बीटा सेल्स खत्म होने लगती है और डायबिटीज टाईप-1 और टाईप-2 होने की संभावना बढ़ जाती है।
मधुमेह होने के मुख्य कारण है-
बदलती जीवन-शैली और शारीरिक श्रम की कमी होना।
अधिक तनाव दबाव के कारण आहार-शैली बिगड़ जाना।
धूम्रपान, अल्कोहल या अन्य कोई नशा करना।
इन कारणों से दिमाग के हाईपोथेलेमस पर असर पड़ना।
प्लास्टिक का प्रयोग करना। प्लास्टिक धूप में रखने या गर्मी या ताप के प्रभाव में आकर प्लास्टिक से बिसफिनाइल, थैलेट्स और अन्य रसायन उत्पन्न होते हैं जो पेनक्रियाज की बीटा सेल्स की माइटोकॉड्रिया पर बुरा प्रभाव डालकर मधुमेह बीमारी उत्पन्न हो जाती है।
मधुमेह संबंधी एक शोध में बताया गया है कि हम विभिन्न खाद्य पदार्थों के माध्यम से प्रति सप्ताह 5 ग्राम तक प्लास्टिक खा जाते हैं।

अधिक शोर शराबा या चिल्लाहट के बीच रहना या सड़कों पर तेज हॉर्न आदि के प्रभाव से दिमाग में हाइपोथेलेमस पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
18-30 साल के युवाओं में भी डायबिटीज टाईप-1 और टाईप-2 के रोगियों को रेटिनोपैथी होने की संभावना हो जाती है। उपचार के अभाव में रोगी की आंखों की रोशनी तक जा सकती है।
अच्छी, स्वस्थ और संतुलित दिनचर्या अपनानी चाहिए।
कम से कम 7 घंटे की पूरी नींद जरूर लेनी चाहिए।
पौष्टिक और संतुलित भोजन करना चाहिए।

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