डायबिटीज के कुछ सच जानिए कि भारत को दुनिया की डायबिटीज केपीटल कहा जाता है।
डायबिटीज लाईफ स्टाईल डिसऑर्डर से जुड़ी समस्या है जिसे संतुलित जीवन-शैली और आहार-विहार से नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि माता-पिता को डायबिटीज है तो बच्चों को भी डायबिटीज होने का खतरा हो सकता है किंतु यह जरूरी नहीं कि बच्चों को भी होगी।
यदि एक बार इंसुलिन लेना शुरू कर दिया है तो यह कतई जरूरी नहीं कि इंसुलिन कभी बंद ही नहीं होगी बल्कि सच यह है कि टाईप-1 मधुमेह की स्थिति को छोड़कर अन्य स्थिति में इंसुलिन लेना बंद हो सकता है।
डायबिटीज रोग में किसी भी प्रकार का नशा नहीं किया जाना चाहिए और नशे से सदैव दूर रहना चाहिए।
गर्भावस्था में डायबिटीज को नियंत्रित किया जाना बहुत आवश्यक है अन्यथा अन्य तकलीफें बढ़ने के साथ शिशु को भी मधमुह का खतरा हो सकता है। जेस्टेशनल डायबिटीज गर्भावस्था के बाद अर्थात् प्रसव के बाद स्वतः ही ठीक हो जाती है।
संतुलित जीवन-शैली और आहार-विहार से कुछ मामलों में मधुमेह ठीक भी हो सकता है।
मधुमेह रोगी को बिना पॉलिश किए हुए चावल ही खाने चाहिए।
यह डायबिटीज के कुछ सच है कि डायबिटीज के शुरूआत में थकावट का अनुभव होना, अचानक ही वजन कम हो जाना, बार-बार बहुत भूख व प्यास लगना, भूख पर नियंत्रण खत्म होना, थोड़ी-थोड़ी देर में पेशाब के लिए जाना, अधिक से अधिक खाने के बाद भी वजन में लगातार कमी आना, जननांगों में जलन या सूजन होना, बार-बार संक्रमण होना, चोट लग जाने पर घाव जल्दी से नहीं भरना या घाव भरता ही नहीं, हाथ-पैरों में झनझनाहट, आँखों से कम व धंुधला दिखाई देना, नेत्र ज्योति कम हो जाना आदि कुछ सामान्य लक्षण मधुमेह रोगियों में प्रकट हो सकते हैं। यदि मधुमेह रोग पाँच-छः वर्ष से अधिक पुराना हो जाता है तब कई जटिल रोग ष्शरीर में उत्पन्न हो जाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
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