डायबिटीज और इंसुलिन क्या है? आइए और जानते है कि डायबिटीज शरीर में एक मेटाबालिक डिसऑर्डर है जिससे शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है। व्यक्ति के खून में ग्लूकोज अथवा शर्करा अथवा शुगर की एक सीमित मात्रा ही व्यक्ति को स्वस्थ रख सकती है। इंसुलिन की कमी से खून में ग्लूकोज की मात्रा एक सीमा से अधिक बढ़ जाती है। ग्लूकोज का स्तर खून में बढ़ जाने से कई पेरशानियां व बीमारिया उत्पन्न कर देता है।

इंसुलिन क्या है?
इंसुलिन अग्नाश्य (पैंक्रियाज) की बीटा कोशिकाओं में बनने व निकलने वाला एक हार्मोन है जो ग्लूकोज के स्तर और मेटाबॉलिज्म को दुरूस्त रखता है। शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा ग्लूकोज से प्राप्त होती है। ऊर्जा मिलने से ही व्यक्ति कार्य कर पाता है अन्यथा ऊर्जा के अभाव में व्यक्ति कृशकाय हो जाता है।
टाईप वन डायबिटीज क्या है?
टाईप वन डायबिटीज दुबले और पतले लोगों को भी हो सकती है। इसमें इम्यूनिटी सिस्टम शरीर के विपरीत कार्य करने लगता है और खून में शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है। शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है जिसके कारण पूरी जिंदगी इंसुलिन लेना पड़ता है।

टाईप टू डायबिटीज क्या है?
टाईप टू डायबिटीज दूषित जीवन-शैली, खराब आहार-विहार, तनाव, आलस्य व अन्य शारीरिक क्रिया के अभाव के कारण हो जाती है। इस कारण इंसुलिन का शरीर की आवश्यकता अनुसार निर्माण नहीं होता है। कोशिकाओं में इसुलिन रिसेप्टर्स ग्लूकोज नहीं खींच पाते हैं जिससे खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।

स्वस्थ व्यक्ति का सामान्य ब्लड शुगर क्या होना चाहिए?
फास्टिंग ब्लड शुगर 100 से कम होना सामान्य होता है।
खाने के बाद (पीपी) 140 से कम होनी चाहिए।
एचबी1एसी 5.7 से कम है तो सामान्य है।
प्री-डायबिटीज अवस्था में जागरूक रह कर संभल सकते हैं।
फास्टिंग ब्लड शुगर 100 से 125 के बीच इंपेयर्ड फास्टिंग ग्लूकोज
खाने के बाद (पीपी) 140 से 155 इंपेयर्ड ग्लूकोज टॉलरेंस
एचबी1एसी 6.4 तक पहुंच जाने से सावधान व सतर्क रहने की आवश्यकता हो जाती है।
ब्लड शुगर कितना हो कि जब पता चल जाए कि वाकई डायबिटीज है?

फास्टिंग ब्लड शुगर 126 एमजी/डीएल से अधिक हो जाना।
खाने के बाद (पीपी) 200 एमजी/डीएल हो जाना।
एचबी1एसी 6.4 से अधिक हो जाना।
डायबिटीज और इंसुलिन क्या है इसकी जानकारी हम सभी को रखनी आवश्यक है।
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