नमस्कार मुद्रा कैसे की जाती है जानिए अनेक फायदे ? How to do Namaskar mudra and know benefits

नमस्कार मुद्रा कैसे की जाती है और जानिए अनेक फायदे । नमस्कार मुद्रा प्रकृति से जुड़कर चेतना का विकास करके मस्तिष्क के विचारों में ईश्वरीय शक्ति का प्रवाहन करती है।

नमस्कार मुद्रा खड़े होकर की जा सकती है।

नमस्कार मुद्रा बैठ कर की जा सकती है।

नमस्कार मुद्रा दण्डवत की जा सकती है।

नमस्कार मुद्रा कैसे की जाए?

दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार करना नमस्कार मुद्रा है। दोनों हाथों की अंगुलियां परस्पर मिलाकर हल्का दबाव देते हुए आपस में जोड़े। अंगुठे छाती के बीच व दोनों कनिष्ठा अंगुली बीपद के नीचे रहें।

यदि खड़े होकर नमस्कार मुद्रा कर रहे हैं तब दोनों पैर के अंगूठे व एडी आपसे में सटे हुए रखें। गर्दन को धरती की ओर झुका कर आँखें बंद करके अभिवादन करें। यह स्थिति नमस्कार मुद्रा है।

इस अभ्यास के दौरान दीर्घ श्वास प्रेक्षा करें अर्थात् लम्बा गहरा श्वास लें और छोड़ें।

इस प्रयोग के दौरान चेहरे पर मुस्कुराहट बनी रहें और यह प्रयोग पांच मिनट से आठ मिनट तक करें।

इस अभ्यास से चाल में तेजी, जोश, उमंग, आनन्द, खिलखिलाहट और ज्ञान तंतुओं का विकास होता है।

यदि बैठकर नमस्कार मुद्रा कर रहे हैं तब गर्दन को जमीन से लगाकर प्रणाम करें।

इस अभ्यास के दौरान दीर्घ श्वास प्रेक्षा करें अर्थात् लम्बा गहरा श्वास लें और छोड़ें।

मौन की स्थिति बनाए रखें और चेहरे पर मुस्कुराहट रखते हुए यह अभ्यास कम से कम 10 मिनट करें।

इस अभ्यास से चेहरे पर कांति, कोमलता व शांति आने लगती है और अहंकार का नाश होता है।

यदि दण्डवत् नमस्कार मुद्रा कर रहे हैं तब धरती पर पेट के बल लेट कर दोनों पैरों को आपस में मिला कर ललाट धरती को छूते हुए दोनों हाथों को लम्बा करके सष्टांग करें।

इस अभ्यास के दौरान श्वास व विचार पर ध्यान केन्द्रित करें। चेहरे पर पूर्ण शांति बनाए रखें। इस मुद्रा का

अभ्यास 20 मिनट तक किया जा सकता है।

नमस्कार मुद्रा किसी भी स्थिति में की जाए लाभ जरूर मिलता है।

नमस्कार मुद्रा से अहंकार का नाश होता है।

नमस्कार मुद्रा से सामने वाले पर आपके अच्छे व्यक्तित्व से प्रभावित होता है।

नमस्कार मुद्रा से एक सकारात्मक ऊर्जा चक्र का निर्माण होता है जिसके प्रभाव से ऊर्जा वर्तुल गति में घूमकर प्राणवान बनाती है।

नमस्कार मुद्रा व्यक्ति अविश्वसनीय परिवर्तन करता है। यह मुद्रा विकास की ओर ले जाती है। इस मुद्रा के प्रभाव से स्वयं तथा सामने वाले में भी रासायनिक परिवर्तन ला देती है। इस मुद्रा के प्रभाव से घृणा, ईर्ष्या, जलन व द्वेष रखने वाले व्यक्ति में भी भावनात्मक रूप से रासायनिक परिवर्तन हो जाते हैं।

नमस्कार मुद्रा शरीर व मन के हार्मोन्स, रसायनों व अल्फा तरंगों को विकसित करने में चमत्कारिक रूप से मदद करता है।

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