वसा खाना बिल्कुल नहीं छोड़े यह बहुत जरूरी है। कार्बोज की तरह ही वसा में भी कार्बन, हाईडोजन व ऑक्सीजन के यौगिक होते हैं। आहार में अधिक मात्रा में पाए जाने वाले पोषक तत्त्वों के रूप में वसा शरीर के लिए बहुत आवश्यक व महत्त्वपूर्ण पदार्थ है किन्तु आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 1 ग्राम वसा में 9 किलो कैलोरी उर्जा मिलती है जोकि एक ग्राम कार्बोज या प्रोटीन से मिलने वाली कैलोरी से दोगुनी से भी अधिक है। वसा की अल्प मात्रा से ही ष्शरीर में ऊर्जा की आवश्यकता पूर्ण हो जाती है अतिरिक्त वसा उत्तकों में जमा हो जाती है।

एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 100 ग्राम चिकनाई आवश्यक है। वसा संतुलित मात्रा में लेना ही पर्याप्त है। अधिक मात्रा जीवन के लिए घातक हो सकती है। वसा अमाशय में वृद्धि के साथ इसकी गतिशीलता में कमी व भूख में कमी कर देती है।
वसा की कमी से हाथ-पैरों में पानी भर जाना, त्वचा की स्निग्धता समाप्त हो जाना व शारीरिक शक्ति का हृास व रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है।
रेश की भांति ही वसा के प्रयोग से बहुत देर तक भूख नहीं लगती है जल्दी ही तृप्ति का अनुभव होता है।
वसा को पाचन में अधिक समय लगने से यह अमाशय में देर तक रहती है। त्वचा के नीचे स्थित वसा की परतें शरीर को गर्म रखती है।
हृदय व गुर्दों के चारों ओर वसा की परतें होती है जोकि चोट व झटकों आदि से रक्षा करती है। यह अवरोधक का कार्य करती है।

वसा में विलय होने वाले विटामिनों को वसा ही शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाकर वाहक व अवशोषण का कार्य करती है। अमाशय व अग्नाश्यक रस में उपस्थित लाइपेज एंजाइम वसा के पाचन में सहायक होते हैं।
वसा जल में मिले तब ही एंजाइम क्रिया कर सकते हैं किन्तु वसा तो जल में अघुलनशील होती है जिसके लिए यकृत से निकलने वाला पित्त रस सहायता करता है। पित्त रस वसा को छोटी-छोटी इकाइयों में तोड़ कर आसानी से जल व पाचन रस में मिला देता है। इस प्रकार वसा पर आसानी से क्रिया होकर पाचन, अवशोषण व उपयोग होता है, इसलिए वसा खाना बिल्कुल नहीं छोड़े यह बहुत जरूरी है।
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