भोजन में रेशा (फाईबर) पौधों, फल, सब्जियों व अनाज में कोशिकाओं की दीवारें बनाता है जोकि अपाच्य होता है इसे एन्जाईम्स द्वारा तोड़ा नहीं जा सकता है और शरीर द्वारा अवशोषित नहीं किया जा सकता किन्तु इसमें अनेक गुण विद्यमान है। जल में घुलनशील व जल में नहीं घुलनेवाला दो प्रकार का रेशा होता है। इन्हें पचाने में अधिक ऊर्जा व्यय होती है।

रेशा पाचन में सहायक है
सब्जियों, अनाजों में अघुलनशील रेशा अधिक होता है जोकि पाचन में सहायक होते हैं तथा कब्ज नहीं होने देते।
रेशा एचडीएल कोलेस्ट्रोल बढ़ाता है
घुलनशील रेशे सीरम कॉलेस्ट्राल कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रोल एचडीएल का श्रेष्ठ स्तर बनाए रखते हैं।
रेशा व सेलुलोस आदि भी कार्बोज के रूप है। छिलके वाले अनाज,दालें, लोबिया, राजमा आदि अच्छे स्रोत हैं।
रेशा इन्सुलिन के स्तर को संतुलित रखता है
इन्सुलिन से भूख अधिक लगती है। उच्च रेशा भूख कम करत है। उच्च घुलनशील वाले रेशे अमाशय व आँतों में अधिक समय तक रहते है खाद्य संरचना पर दृढ़िकारकता के प्रभाव से संभवतः पेट भरा होने का एहसास रहता है अर्थात् कैलोरी की आपूर्ति तो नहीं करता किन्तु भूख की बहुत अच्छी संतुष्टि प्रदान करता है।

रेशा हृदय रोग, बड़ी आँत्र रोग व कैंसर, मधुमेह व अन्य रोगों को ठीक करने में भी मदद करता है।

रेशा से खाने की कम इच्छा रहती है
पाचन तंत्र प्रक्रिया में रेशा में कुछ भी रासयनिक परिवर्तन नहीं होता किन्तु रेशे के अवयव जल सोख कर फूल जाने भोजन भारी बन जाता है और पेट जल्दी ही भरने की संतुष्टि भी हो जाती है और बहुत देर तक भूख भी नहीं लगती है। आवश्यकता से अधिक खाने के लिए रोकता है।
रेशा वजन कम करने में सहायक है
रेशेदार खाद्य पदार्थों को अधिक समय तक अच्छी तरह चबाना पड़ता है। पर्याप्त मात्रा में ग्रहण करने पर अधिक संतोष प्राप्त होता है। वनज कम करने के लिए इन्हें भोजन से पूर्व व मध्य लिया जाए। भोजन के बाद लेने से वजन खास प्रभावी ढंग से कम नहीं होता है।
रेशे में पानी रोकने का गुण है
रेशे में पानी रोककर रखने का गुण रखता है जिससे शरीर में मल सूखता नहीं, विषाक्त पदार्थ जमा होने से रोकता है और आंतों में मुक्त संचरित वायु के निस्तारण में सहयोग देता है।
रेशा कब्ज नाशक है
रेशे अनअवशोषित खा़द्य पदार्थों को मल के रूप में शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। मल को मुलायम बनाकर भारी मात्रा में शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।मल त्याग पर जोर लगाने की आवश्यकता व आदत समाप्त हो जाती है। गेहूँ की चोकर अन्य फल व सब्जियों से दुगुने रूप से मल का भार बढ़ाने में प्रभावपूर्ण है।

ध्यान रहे कि श्रम रहित व्यक्तियों, दुर्बल व क्रशकाय रोगियों को भोजन में रेशा (फाईबर)/ रेशेदार पदार्थ का सेवन न करें तो बेहतर है अन्यथा चिकित्सीय देखरेख में ही सेवन किया जाए।
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