नमक और इनको खाने से पहले कुछ जान लें। (भाग-3)
नमक और इनको खाने से पहले कुछ जान लें कि सभी चीजे सभी के लिए लाभदायक नहीं होती है। शरीर की प्रकृति के अनुसार ही चीजों को भोजन में शामिल करना चाहिए।
चावल-गुर्दे और मसाने की पथरी में चावल खाना बहुत नुकसान करता है।

मूंगफली-मूंगफली गरम प्रकृति के लोगों को नुकसान करती है। अधिक मूंगफली के सेवन से पित्त बढ़ता है।

ब्रेड/डबल रोटी-डबल रोटी के अधिक सेवन से पेट के रोग बढ़ जाते हैं। मैदे बनी चीज़ो को अधिक खाने से कब्ज, अमाशय में छेद जिसे पेप्टिक अल्सर कहते है जैसे गंभीर रोग हो जाते हैं।

दही-सांस संबंधी रोग, खांसी, दमा, कफ, शोथ, पित्त व खून की खराबी में दही नहीं खाना चाहिए। दही में मिश्री या शहद डालकर खाने से इसके गुणों में वृद्धि हो जाती है।

हींग-लीवर संबंधी रोग और गर्म प्रकृति वालों को हींग का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए। अधिक हींग के प्रयोग से पागलपन, हिस्टीरिया और उन्माद हो जाता है।

नमक-खुजली, हिस्टीरिया, सूजन, गुर्दे के रोग, जलोदर, दाद, उच्च रक्तचाप, सूजन व गठिया रोगों में नमक का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। नमक सफेद जहर है। नमक को औषद्यी के रूप में ही खाना चाहिए। भोजन या अन्य आहार में ऊपर से नमक लेना बहुत हानिकारक है। नमक की प्रकृति भारी होती है। यह गर्म पित्त को विकृत कर देता है। अधिक प्यास लगने, बेहोशी, उग्रता, चमड़ी को नुकसान पहुंचाने, इंद्रियों को दुर्बल बनाने वाला, समय से पहले बुढ्ढा बनाने वाला, झुर्रियों का कारण, बालों की समय पहले सफेदी और गंजापन लाने का कारण बनता है। आटे में नमक डालकर बनाई रोटी खाने पर दांतों में रोटी के कण चिपक जाते हैं और दांतों की जड़ों को कमजोर कर देते हैं।

शहद-अधिक गर्म खाने या पीने की वस्तुओं में शहद मिलाने सेशहद के गुण नष्ट हो जाते हैं। घी, तेल या अन्य कोई भी चिकने पदार्थों के साथ शहद- बराबर मात्रा में लेने से जहर का काम करता है।

चीनी – चीनी भी सफेद जहर है। इसे खाने से कॉलेस्ट्राल बढ़ता है। मधुमेह रोगियों को चीनी या इससे बनी मिठाई आदि नहीं खानी चाहिए। मीठी चीज खाने के बाद दांतों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए नहीं तो दांत खराब हो जाते है।

कॉफी- अधिक लम्बे समय तक अधिक मात्रा में कॉफी पीने से स्नायु तंत्र कमजोर हो जाता है। इसे दवाई के तौर पर ही लेना अच्छा है।

चाय-चाय पीने से पेशाब अधिक आता है। अनिद्रा रोगियों को चाय पीने से बचना चाहिए। एसिडिटी और पेप्टिक अल्सर रोगियों के चाय बहुत हानिकारक है। भूख लगना बंद हो जाती है। वात रोगियों को चाय नहीं पीनी चाहिए। चाय पेशाब में यूरिक एसिड बढ़ाती है जिससे गठिया, जोड़ों में सूजन बढ़ जाती है। चाय लीवर को कमजोर करती है। मंदाग्नि, पेट में वायु, दिल का अधिक धड़कना, अजीर्ण व खून में कमी पैदा करती है। त्वचा में सूखापन लाती है जिससे सूखी खुजली चलती है और त्वचा सख्त हो जाती है। चाय को औषद्यी के रूप में ही लेना चाहिए।

पानी-गर्म खाना, खीरा, खरबूजा, तरबूज, ककड़ी खाने के बाद, सोकर उठने के तुरंत बाद, दस्त हो जाने के बाद, दूध, चाय, छींके आने के बाद और धूप से आने के बाद तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए।

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