पेट शरीर की धुलाई कैसे करें? How to wash stomach and body?

पेट शरीर की धुलाई कैसे करें?


पेट शरीर की धुलाई कैसे करें इसका मतलब है कि पेट के भीतरी अंगों को दूसरे शब्दों में पाचन अंगों व शरीर को स्वस्थ और स्वच्छ कैसे रखें।

पेट शरीर की धुलाई कैसे करें? How to wash stomach and body?

कई बार लगता है कि पेट भारी लग रहा है या दिल पर बोझ का महसूस होता है। खाया हुआ भोजन पचता नहीं है। पेट फूला लगता है। वायु गोला बनता है।

रात को अच्छी नींद भी नहीं आ पाती है। गैस की समस्या बनी रहती है।

इन सबसे बचने का तरीका है कि एक ग्लास गर्म पानी में एक नीबू का रस मिलाकर दिन में दो-तीन बार पीने से पेट के सभी पाचन अंगों और शरीर की धुलाई हो जाती है। कुछ दिन नियमित प्रयोग से शरीर में नई स्फूर्ति, हल्कापन और नई ऊर्जा का प्रवाहन शरीर में होता हुआ अनुभव होता है क्योंकि इस प्रयोग से शरीर व खून के सभी गंदे और दूषित पदार्थ मल-मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

पेट शरीर की धुलाई कैसे करें? How to wash stomach and body?

यदि खाया हुआ खाना नहीं पचता हो तो नीबू की दो फांके करकें उसके ऊपर चुटकी भर सैंधा नमक बुरक कर गर्म करें और भोजन के बाद सहता हुआ गर्म चूसने से पाचन तंत्र के अंगों को बल मिलता है और भोजन आसानी से पच जाता है।

स्वस्थ शरीर के लिए पहली शर्त होती है कि पेट में कब्ज रहना ही नहीं चाहिए। आंतें पूरी तरह खाली होनी ही चाहिए।

ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि खाने की वस्तुएं अस्त-व्यस्त और असंतुलित रूप से जब मर्जी तब एक के ऊपर एक बार-बार ठूंसते रहें और एक बार खाया हुआ भोजन शरीर में पचने से पहले ही दूसरे आहारों का भंडार जमा कर लें।

कुछ दिन तो शरीर स्वयं की अपनी शक्ति व आंतरिक क्रिया से पाचन अंगों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रयास करता रहेगा किंतु अनियमित व अपौष्टिक भोजन बार-बार पेट में पड़ने और अच्छे रसों का स्राव नहीं हो पाने के कारण आंतों में पड़ा भोजन पड़ा ही रह जाता है। आगे नहीं खिसकता और ना ही पचता है। पाचक रसों का स्राव भी गफलत में रूक जाता है और खाया हुआ भोजन सड़ने लगता है।

यही क्रम लगातार रहने से पेट दर्द, भूख नहीं लगना, अजीर्ण, खट्टी डकार, खूनी दस्त, उल्टी गैस, अल्सर और कब्ज आदि समस्याएं भी पैदा कर देता है। यदि फिर भी नहीं रूके तो बेचारी आंते और दूसरे पाचन अंग भी हार जाते है। गलत खान-पान व जीवनशैली का असर गंभीर रोगों के रूप में प्रकट हो जाता है जोकि सबसे घातक है। ं

पाचन अंगों व शरीर को स्वस्थ, साफ व स्फूर्त रखने में नीबू का प्रयोग बिना नमक व शक्कर के किसी न किसी रूप में संतुलित रूप से और आवश्यकता अनुसार ही ग्रहण करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है। रोग व स्वास्थ्य की आवश्यकतानुसार नीबू का सीमित प्रयोग ही लाभदायक है। नीबू का अधिक सेवन भी हानिकारक है।

पर्याप्त मात्रा में पानी खूब पीना चाहिए।

सावधानी-पैर के जोड़ो में दर्द, टॉन्सिल्स, पथरी व अल्सर वाले रोगियों को नीबू नहीं खाना चाहिए। कई लोगों को नीबू खाने के बाद चक्कर आते है या लो ब्लड प्रेशर हो जाता है ऐसे लोग भी नीबू के सेवन से बचें।

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