खनिज लवण कौन-कौन से है और क्यों जरूरी है? What are minerals and why are they important?

खनिज लवण कौन-कौन से है और क्यों जरूरी है?


खनिज लवणकैल्शियम और फास्फोरस-दोनों अधिकतम हिस्सा हड्डियों और दाँतों में होता है। यह दोनों हड्डियों एवं दांतों के विकास तथा शरीर की क्रियाओं को नियंत्रण करने में सहायता करते हैं। हृदय की मांसपेशियों का फैलना व सिकुड़ना, पदार्थों को कोशिकाओं के अन्दर ले जाने व बाहर लाने में सहायता करना और एक स्नायु से दूसरी स्नायु कोशिका तक संदेश भेजने का कार्य करता है। कटने व चोट लगने पर खून का थक्का जमने में सहायता करता है। दूध व दूध से बने पदार्थ, दही, खोया, पनीर, झींगा, केकड़ा, मछली, चना, उड़द व मूंग की दाल, मोठ, राजमा, सोयाबीन, तिल, नारीयल, बादाम, अखरोट आदि मंे बहुत अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है।

शरीर में कैल्शियम का अवशोषण अच्छा हो इसके लिए विटामिन डी, प्रोटीन और कार्बोज सहायता करते हैं। अधिक फॉस्फोरस वाले आहार लेने से कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है। हरी सब्जियों व अनाज में कुछ ऐसे तत्त्व जैसे ऑक्सेलेट और फाईटेट्स होते है जो शरीर में कैल्शियम के पूर्ण रूप से अवशोषण में बाधा डालते है इसलिए जरूरी है कि अधिकतम मात्रा में कैल्शियम वाला आहार खाना चाहिए जिससे शरीर को कैल्शियम की पूर्ति पूरी तरह से हो सकें।

सोडियम-

सोडियम कोशिका के बाहरी एवं आंतरिक कोशिका द्रव्य में संतुलन व नियंत्रण रखता है। शरीर के द्रव्यों में अम्लता और क्षारता के संतुलन का नियंत्रण रखता है। एक स्नायु का संदेश दूसरी स्नायु तक भेजने का काम करता है। मांसपेशियों के संकुचन में सहायता करता है। पदार्थों के कोशिका में आने व जाने पर नियंत्रण रखता है। खाने वाले नमक से सोडियम मिल जाता है। यह नमक सोडियम क्लोराइड है। दूध, अंडे का सफेद भाग, मांस, मुर्गी, मछली और हरी पत्तेवाली सब्जियां, पालक व मैथी आदि सोडियम के अच्छे स्रोत है।

पोटेशियम-

सोडियम के जो कार्य है वही कार्य पोटेशियम के भी है। पोटेशियम फल, सब्जियों, हरी पत्तेवाली सब्जियां, कच्चा हरा नारीयल, केला, आलू, गाजर, टमाटर, नीबू और साबुत अनाजों में बहुत मात्रा में पाया जाता है।

क्लोराइड-

सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड के कार्य परस्पर समान है। यह नमक और वनस्पतिक पदार्थों में बहुत अच्छा पाया जाता है।

जिंक-

वृद्धि के लिए आवश्यक है और तांबा हिमोग्लोबिन के निर्माण में सहायता करता है। प्राकृतिक खाद्य पदार्थों में यह दोनों पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।

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