आओ कुछ अच्छा जान लें Let’s get to know something good

आओ कुछ अच्छा जान लें

आयुर्वेद का सि़द्धान्त है-दिन में सोना वायु को बढ़ाता है।

हिचकी आना पाचन तंत्र के विकार की सूचना है।

हाइपर एसीडीटी से बुरे विचार, बुरे भाव पैदा होते है।

पापड़ में एक ऐसा क्षार तत्त्व है, जो पैन्क्रियाज की झिल्ली को अस्त-व्यस्त कर देता है, जिसके कारण मधुमेह की संभावना अधिक हो जाती है।

पाचन तंत्र की स्वस्थता का महत्त्वपूर्ण प्रयोग है-केवल खाना, कोरा खाना और कुछ नहीं करना। न विचार करना न योजना बनाना।

यकृत ठीक नहीं है तो हिंसा की भावना पैदा हो जाएगी।

मोटापे व अपच का एक कारण है, भोजन को जल्दी-जल्दी करना।

परिमित भोजन की एक कसौटी है-पाचन-तंत्र और उत्सर्जन तंत्र की स्वस्थता।

बीमारी का लक्षण है-पेट में विजातीय अथवा दूषित तत्त्वों का एकत्रित होना।

रक्त में ग्लूकोज का प्रतिशत स्तर कम होने पर आत्महत्या/अपहरण की भावनाएं पैदा होती है।

श्वास केवल जीवनदायी ही नहीं, आरोग्यदायी भी है।

श्वास जीवन की चाबी है इसे हिसाब से खर्च करें। लम्बा श्वास लेने व छोड़ने की आदत बना लें।

फेफड़ों की क्षमता में मजबूती के लिए लम्बा गहरा श्वास लेना व छोड़ना है।

पद्मासन में अर्हंम् की ध्वनि करने से फेफड़े मजबूत होते है।

श्वास पूरे शरीर में ऑक्सीजन और रक्त का वितरण करता है।

जो कार्य शामक औषधियां नहीं कर पाती, वह कार्य श्वास कर देता है।

सर्दी व जुकाम मौसम जनित बीमारियां है।

स्वास्थ्य का बहुत बड़ा कारण है-रक्ताभिसरण, शरीर में रक्त का सम्यक् संचार।

उच्च रक्तचाप का एक कारण है-हृदय द्वारा अतिरिक्त श्रम करना।

उच्च रक्तचाप का नियमन करने के लिए आहार का विवेक रखना जरूरी है।

शुद्व रक्त धमनियों में जितना जाता है, उतना ही रक्त का शोधन होता है।

जवान वह होता है जिसका रक्तचाप संतुलित होता है।

कायोत्सर्ग/शिथलीकरण हृदय रोग के लिए सर्वोत्त्म दवा है।

एक हृदय वह है, जो धड़कता है, रक्त का ष्शोधन करता है।

एक हृदय वह है, जो मस्तिष्क में है, भावों का ष्शोधन करता है।

प्राण अपान के संतुलन से हृदय रोग को निर्मूल किया जा सकता है।

बिना चबाए खाना आंत को बिगाड़ने का बड़ा अच्छा तरीका है।

भोजन में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संतुलन होने से पाचन-तंत्र स्वस्थ बना रहता है।

जो व्यक्ति हिताहारी और मिताहारी है, वह स्वस्थ रहता है। उसको चिकित्सा के लिए वैद्य की आवश्यकता नहीं होती।
उग्र प्रतिक्रिया से पाचन-तंत्र गड़बड़ा जाता है।

चबा-चबाकर भोजन करने से मानसिक प्रसन्नता बनी रहती है।

संतुलित भोजन तीनों समय समय पर आवश्यक है।

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