कोरोना है-हमें बार-बार नहीं भूलना है
सब चलता है ऐसी मानसिकता को छोड़ दें। परवाह भरी सोच की सही पहल और सुरक्षात्मक व्यवहार की पालना से ही कोरोना जैसे संक्रमण को हराया जा सकता है।
वैक्सिन को दवा नहीं समझे। वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद दो-तीन सप्ताह के बाद ही शरीर में इम्यूनिटी बनती है इसलिए मास्क नहीं लगाने की भूल नहीं करें।
कुछ भी हो चाहे कहीं गए या नहीं गए। किसी को छुआ या नहीं छुआ। किसी चीज़ को उठाया या नहीं उठाया। हाथ लगाया या नहीं लगाया दिन में 10-15 बार साबुन से हाथ धोने के लिए खुद को और अपने आस-पास सभी को प्रेरित करते रहें।

अपने घर के ही तो है या अपने नजदीकी ही तो है। कोई लक्षण भी नहीं है। क्या फर्क पड़ता है सब साथ मिल बैठ लेते है। खा पी लेते है। घूम लेते है। खेल लेते है। यदि संक्रमण से बचना चाहते है तो अभी भी सोशल डिस्टेंसिंग की बहुत आवश्यकता है।
मास्क लगाने की क्या जरूरत है अपने ही तो है। लेकिन अपनो को बचाने के लिए ही अपने को मास्क लगाना है।

बच्चे है इन्हें क्या फर्क पड़ता है। जी नहीं! बच्चों को भी मास्क लगाना है और संक्रमण से बचाना है।
संक्रमण के लक्षण दिखते ही तुरंत एक बार तो चिकित्सक से सम्पर्क जरूर करें।
वैक्सीन लगाने के बाद भी संक्रमण हो सकता है और उससे जल्दी ही ठीक भी हो जाते है लेकिन ध्यान रहें इस अवधि में दूसरों में संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है यदि मास्क नहीं लगाते है।
आधी-अधूरी जानकारी या इलाज का खुद पर ही प्रयोग और अमल नहीं करें।
सभी के प्रति स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति लापरवाही का रवैया बदल लें।
सेहत की नियमों को पालना करके स्वयं, अपने परिवार, समाज और देश के स्वास्थ्य व सुरक्षा के प्रति लापरवाही भरा व्यवहार नहीं करके जागरूक व सतर्क रहें। दूसरे क्या कर रहें है यह नहीं देखकर आप खुद अपने व अपनों की सुरक्षा के लिए क्या कर रहे हैं यह देखिए।
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