शरीर की वृद्धि व विकास प्रोटीन के साथ
सभी प्रकार के प्रोटीन भिन्न-भिन्न एमीनोऐसिड से बने होते है। कुछ एमिनो एसिड शरीर द्वारा निर्मित किए जा सकते है तो कुछ नहीं जिन्हें दैनिक आहार द्वारा ही लिया जा सकता है जिनका भोजन में होना बहुत आवश्यक है। पशुओं से प्राप्त खाद्य पदार्थ में एमिनो एसिड उचित अनुपात व मात्रा में होने से प्रोटीन उच्च कोटि का होता है जबकि वनस्पति से प्राप्त प्रोटीन इसके विपरीत है इसमें पाया जाने वाला प्रोटीन निम्न कोटि का होता है। जैसे कि अनाज में लाइसिन कम तथा मिथायोनिन अधिक होता है जब कि दाल में मिथायोनिन कम व लाईसिन अधिक होता है। इसीलिए संतुलित आहार के लिए दाल, अनाज व अन्य पदार्थ सम्मिलित बनाकर वनस्पति से प्राप्त प्रोटीन के स्तर को बेहतर बनाया जा सकता है।

प्रोटीन के अच्छे स्रोत
दूध से बने पदार्थ, खोया, पनीर, मूंगफली, बादाम, काजू, अखरोट, चने की दाल, मसूर दाल, मूंग दाल सोयाबीन, राजमा तथा मांस व मछली सोयाबीन में प्रोटीन बहुत अच्छा होता है।
दूध एक ऐसा आहार है जिसे शाकाहारी व मांसाहारी दोनों द्वारा प्रयोग किया जाता है इसमें लाईसिन की पर्याप्त मात्रा होती है। दूध में स्थित प्रोटीन उत्तम है। रोटी दाल, सब्जी, के साथ दूध, दही पनीर या छाछ शामिल करने से प्रोटीन का स्तर बेहतर बनाया जा सकता है। भोजन में थोड़ी मात्रा में दूध अवश्य होना चाहिए। अनाज में र्प्याप्त प्रोटीन अच्छी कोटि का नहीं होता है। दाल के साथ अनाज का प्रयोग करने से प्रोटीन का स्तर बेहतर बनाया जा सकता है।
शरीर की वृद्धि व विकास, रख रखाव व टूटे फूटे उत्तकों को को बदलने के प्रोटीन आवश्यक है। यह सुरक्षात्मक पदार्थ है। शरीर के पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए वाहक का कार्य करता है। विशेष परिस्थितियों में प्रोटीन ष्शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह ध्यान रखिए कि उत्तम कोटि के प्रोटीन को शरीर मंे प्रोटीन बनाने के लिए काम लिया जाता है।
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