सांस लेने का सही तरीका क्या है? {tips}

सांस लेने का सही तरीका क्या है?

सांस लेने का सही तरीका क्या है?

जब तक सांस है तब तक जीवन की डोर है। सही ढंग से ली गई सांस शरीर के कोने-कोने में प्राण वायु तथा प्राण ऊर्जा का प्रसार करती है।
सांस लेने का सही तरीका शरीर की प्रत्येक कोशिका में ऑक्सीजन पहुंचने की क्षमता व स्थिति तय करता है।
सांस लेने का तरीका बीमार भी कर सकता है और शरीर को स्वस्थ भी कर सकता है। गलत तरीके से ली गई श्वास मन व शरीर को रोगी बना देता है और सही तरीके से ली गई श्वास से मन और शरीर को प्रफुल्लित व पुष्ट रखा जा सकता है।
नियंत्रित सांस लेने की प्रक्रिया जोकि अभ्यास से ही संभव है यह फेफड़ों के निचले तंत्र पर भी बेहतर नियंत्रण बनाने में सहायक होती है।
योगाभ्यास की एकाध प्रक्रिया को छोड़ कर श्वास नाक से ही ली जानी चाहिए नाक में स्थित म्यूकस और रोम अन्दर आने वाली हवा को फिल्टर करके ही शरीर में प्रवेश देते है। नाईट्रिक ऑक्साईड जोकि रोगाणुओं और पर्यावरण जनित रोगों को मारने में सक्षम होती है यह नाक के भीतर सक्रिय होती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सुदृढ़ होती है। मौसमी संक्रमण और बीमारियों से रक्षा भी करती है।
नाक से सांस लेते है तो धीमी व दीर्घ श्वास लेने से फेफड़ों में अधिकतम ऑक्सीजन अवशोषित होती है।
नाक से सांस लेने पर शरीर में कार्बन डाईऑक्साईड का संतुलन हमारे शरीर में बना रह पाता है जोकि हमारे शरीर के वायु मार्ग को खुला रखने में मदद करती है। नाक से श्वास लेने व छोड़ने से फेफड़ों में अधिक मात्रा में हवा का जमाव नहीं हो पाता जिससे फेफड़े अच्छी तरह खाली हो पाते है और अगली सांस बेहतर और पूरी तरह ले पाते है। नाक से जितनी मात्रा में श्वास लेते है उतनी मात्रा में छोड़ते भी है।
मुंह से श्वास लेने पर अनेक रोग जकड़ जाते है। मुंह से श्वास लेने पर आम तौर पर मुंह का सूखना, सोते समय खर्राटों का आना, नींद का बीच-बीच में कई बार खुलना, सोते समय अच्छी तरह सांस नहीं ले पाना, सुबह उठते समय मुंह सूखा होना तथा सुबह उठने पर नाक का बंद होना, खांसी या सांस का उखड़ना आदि परेशानियां उत्पन्न हो सकती है।
आदत डाल लें कि सांस को बहुत धीरे-धीरे और लम्बा लिया जाएं और धीरे-धीरे और लम्बा छोड़ा जाएं। सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार सांस को लेने बाद कुछ क्षण रूकें और श्वास छोड़ने के बाद क्षमता व सामर्थ्य अनुसार कुछ क्षण रूकें। संतुलित श्वास का तार बना रहें। शिशु को कभी सांस लेते हुए देखा होगा कि श्वास लेते समय पेट की मांसपेशियां फूलती है और श्वास बाहर निकालते समय पेट की मांसपेशियां भीतर की ओर जाती है। ठीक शिशु की भांति श्वास लेनी चाहिए मुंह से श्वास लेने की आदत भूल कर भी नहीं डालें। कई लोग उल्टी तरीके से श्वास लेते है। श्वास लेते समय पेट की मांसपेशियां भीतर की ओर करते है और श्वास छोड़ते समय पेट की मांसपेशियां फूलाते है। ऐसे सांस लेने की क्रिया शरीर को कई रोगों को घर बना देती है।
लम्बा गहरा श्वास लेने व छोड़ने की एक अच्छी आदत बना लें। इस एक अच्छी आदत मात्र में मन व शरीर से स्वस्थ होकर सदैव प्रफुल्लित रह सकेंगे।

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