माँ का गुण अपने आप में एक विज्ञान और कला है।

माँ के शरीर में गर्भ में भ्रूण से शिशु बनता है और संसार में आता है और नया जीवन प्राप्त करता है।
असहाय और अबोध शिशु को माँ अपने सीने से लगा कर उसका पोषण और पालन करती है। शिशु के स्वतंत्र अस्तित्त्व को आकार देती है माँ!
चौबीस घंटे चौकस व चौकन्नी रहकर स्नेह युक्त भावनाओं व व्यवहार से बच्चे की हर क्रिया पर अर्जुन दृष्टि रखती है वो है माँ!
माँ की ममता व स्नेहपूर्ण व्यवहार ही बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रख सकता है। बच्चे के प्रति लापरवाही करने का अपराध माँ नहीं करती है।
माँ की गोद में बच्चे को सारी दुनिया मिल जाती है और माँ की गोद में सीमट कर खुद को सबसे सुरक्षित और आनन्दित महसूस करता है।
बच्चे को केवल स्नेह और प्यार की खोज होती है जो उसे माँ के आँचल में ही मिलता है।
जीवन की बहुत सी कठिनाईयों और समस्याओं का आसानी से माँ सामना कर लेती है।
बच्चे के प्रति लापरवाही व अवहेलना किसी जुर्म से कम नहीं होता है और ना ही क्षमा योग्य होता है यह बात माँ से अच्छा और कोई नहीं जान सकता।
अधिक भावुकता व प्यार करना भी बच्चों के प्रति लापरवाही का व्यवहार है। हमेशा बच्चों की चिंता फिक्र करने वाली माँ अनजाने ही कभी-कभी बच्चों में जिद्वी, पंगु, बिगड़ैल व नकारात्मक व्यक्तित्व का निर्माण भी कर देती है।
बच्चा जैसा देखता व सुनता है वैसा ही उसका व्यक्तित्व और भविष्य का निर्माण होता है यह बात माँ को कभी नहीं भूलनी चाहिए।
बच्चे की खुशी व आनन्द के लिए बच्चे के साथ खेल व कहानियों के साथ माँ सक्रिय रह सकती है किंतु उचित व अनुचित मांग का संतुलन बनाए रखना नहीं भूलना चाहिए।
माँ को जरूर ज्ञात होना चाहिए कि कौनसा पौष्टिक खाद्य पदार्थ शिशु के लिए आवश्यक है? बच्चे की वृद्धि और विकास समुचित हो रहा है या नहीं? बच्चे के रोने का कारण क्या हो सकता है? बच्चे को संक्रमण और बीमारियों से कैसे बचाया जा सकता है? बच्चे के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता का क्या महत्त्व है?
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