गठिया में क्या खाएं: उपयोगी खाद्य पदार्थ और उपचार
1. गाजर सर्वश्रेष्ठ है। कच्चा या उबालकर किसी भी रूप में खाएं। कच्ची गाजर के रस में अधिकतम पोषण मिल जाता है। गाजर में विटामीन ए, बी, सी, ई और के भी बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। इनकी कमी से भी आमवात, संधिवात अर्थात् गठिया हो जाता है। गाजर के रस में 6-7 आंवला का रस मिलाकर पीना बहुत अच्छा रहता है।
2. प्याज की प्रकृति ठण्डी होने के बावजूद गठिया रोग में बहुत लाभदायक है।
3. लहसुन खून साफ करता है। खून में यूरिक एसिड बढ़ जाने से गठिया हो जाता है। लहसुन के रस के प्रभाव से यूरिक एसिड गल कर तरल रूप में पेशाब द्वारा बाहर निकल जाता है।
4. सेब या सेब का रस गठिया को दूर करता है।
5. यूरिक एसिड के साथ जमा चूना ग्रेप फ्रूट खाने से गलकर मूत्र द्वारा बाहर निकल जाती है।
6. हरी पत्तिदार सब्जियां जैसे मैथी, चौलाई, मूली व सरसों आदि हरी सब्जियां खून में यूरिक एसिड को साफ करता है और खून की अम्लता दूर करता है।
7. गन्ना, खजूर, गुड़, मुनक्का व किशमिश आदि का सेवन करना चाहिए।
सावधानी-
पालक का सेवन गठिया में हानिकारक है। पालक के कारण यूरिक एसिड व चूना का संचय बढ़ने लगता है क्योंकि पालक में आक्जेलिक एसिड और चूना अधिक मात्रा में पाया जाता है।
टमाटर, लोबिया, सेम की फली, आलू व सूखे अंजीर में भी पालक जैसे गुण होते है इन्हें भी खाने से बचना चाहिए।
टेनिन व कैफिन आदि अर्थात् चाय, कॉफी, कोको व चॉकलेट आदि से दूर रहना चाहिए।
चीनी व चीनी से बनी मिठाईयां व पदार्थों से दूर रहना चाहिए।
खट्टा दही, छाछ, मट्ठा, कच्चा आम या इमली भी गठिया को बढ़ाता है। यह सब इस रोग में बहुत अधिक हानिकारक है।
सरल उपचार-
सरसों का तेल हल्के हाथों से मलकर सूर्य किरणों का सेवन करें।
जोड़ों में दर्द होने पर चलना-फिरना बंद नहीं करके शक्ति व सामर्थ्य अनुसार कार्य करना व चलना चालू रखना चाहिए जिससे रक्त प्रवाह में सहायता पहुँचती है किन्तु ध्यान रहें कि अधिक सूजन व दर्द की स्थिति में विश्राम कर लेना ही बेहतर है।
ठण्डी हवा व ठण्डे पदार्थों से बचना चाहिए।
जबरदस्ती आसन आदि नहीं करें। शक्ति व सामर्थ्य अनुसार करें।
पश्चिमोत्तासन, भुजंगासन, हलासन, उत्तानपादासन, शलभासन, अर्द्धमत्स्येन्द्रासन व सूक्ष्म यौगिक क्रियाएं की जानी चाहिए।
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