मेरूदण्ड : शक्ति सरलता से कैसे बढ़ाए? Spinal Cord : How to increase the strength with ease?

मेरूदण्ड की शक्ति सरलता से कैसे बढ़ाए?

स्वास्थ्य नियमों का पालन करके मरूदण्ड के स्वास्थ्य को ठीक रख कर ही सुषुम्ना से निकली नाड़ियों द्वारा सारे शरीर को शक्तिशाली बनाया जा सकता है।

रीढ़ की हड्डी अर्थात् मेरूदण्ड में थोड़ा सा विकार भी उठने-बैठने, चलने-फिरने या हिलने में भी बहुत तकलीफ पैदा कर देता है।

मानसिक दुर्बलता के कारण रीढ़ हड्डी में विकार पैदा हो जाते हैं। जो व्यक्ति धीरज खो देता है या हमेशा रोता रहता है वह बेरीढ़ का व्यक्ति कहा जाता है। ऐसे व्यक्ति को चाहिए िकवह अपने मेरूदण्ड की शक्ति बढ़ानी चाहिए।

शारीरिक बल और स्नायु शक्ति पर ही धीरता निर्भर होती है। यदि मेरूदण्ड सुदृढ़ होगा तो स्नायु शक्ति भी बलशाली हो जाती है।

मेरूदण्ड में 26 हड्डियां होती है जिनमें स्थितिअनुसार आकार में परिवर्तन होता है। प्रत्येक हड्डी के चार भाग होते हैं और सभी हड्डियां एक-दूसरे के ऊपर स्थिर होकर बंधनों द्वारा एक-दूसरे से बंधी होती है।

मेरूदण्ड में सुषुम्ना से निकली हुई नाड़ियां छिद्रों से बाहर आकर सारे शरीर के विभिन्न भागों को शक्ति देती है और संदेश और संचालन का कार्य करती है।

शरीर की आवश्यकताएं पूरी करते हुए दैनिक भोजन करें। विटामीन, अच्छा खाद्य नमक और अच्छी प्रोटीन के अभाव में मेरूदण्ड की बनावट खराब हो जाती है।

मैदा व अपच वाले आहार से छोटी आंत के आस-पास की नाड़िया उत्तेजित होकर सुषुम्ना तक पहुँचने से यहाँ आस-पास की नाड़िया भी उत्तेजित होकर दर्द व अकड़न आदि पैदा कर देती है। मांसपेशियों व बंधनों में असमान संकुचन से मेरूदण्ड की कोई भी हड्डी अपने स्थान से हट जाने पर अनेक समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं।

अनुचित व दूषित आहार व मल से नाड़ियों में शिथिलता आ जाती है और जोड़ो में दर्द, हड्डी का अपने स्थान से हटना, आर्थराईटिस, मेरूदण्ड के आकार में विकृति, यक्ष्मा या लकवा आदि हो सकते हैं।

मांसपेशियों व बंधनों को मजबूती प्रदान करने के लिए नियमित व्यायाम, योग, आसन, प्राणायाम व ध्यान किया जाना चाहिए जिससे रक्तसंचार संतुलित बना रहें और प्राणवायु सम्पूर्ण शरीर में समान रूप से प्रवाहित हो सकें। कम प्राणवायु ष्शरीर में पहुंचने पर रीढ़ की हड्डी सीधी नहीं रह कर मुड़ जाती है। प्राणायाम से पसलियां व सुषुम्ना की क्रियाशीलता बढ़ती है।

रोज स्नान करने से रक्तसंचार चुस्त होता है और स्फूर्ति का अनुभव होता है। जब रक्त संचार तेजी से होता है तब मेरूदण्ड के आस-पास की मांसपेशियां सक्रिय हो जाती है और अच्छी तरह से कार्य करने लगती है। अधिक ठण्ड की स्थिति में गुनगुने पानी से स्नान जरूर करना चाहिए।

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