डिस्पोजल के साथ कहीं मोम तो नहीं खा रहे हैं?
घर, बाहर, कार्यालयों, थड़ियों, होटलों, रेस्टोरेन्सटस्, शादियों, पार्टियों, कार्यक्रमों व समारोह में चाय, पानी तथा अन्य खाद्य पदार्थों के सेवन के लिए प्लास्टिक, फॉयल पेपर व कागज के कप प्लेटस् का ही अधिक चलन के साथ प्रयोग किया जाता है।
ऑन लाईन फूड मंगवाने का चलन भी बढ़ चला है। सभी खाद्य पदार्थ प्लास्टिक, फॉयल पेपर व डिस्पोजल में पैक करके ही पहुँचाए जाते है।
डिस्पोजल व पेपर कप से पदार्थों का रिसाव रोकने के लिए इनके निर्माण के समय ही उसमें मोम की पतली परत लगा दी जाती है। गर्म चाय, कॉफी या सूप डालने के समय ग्लास में स्थित मोम भी शरीर में चला जाता है। इनके अधिक प्रयोग से आंत संबंधी बीमारियां भी हो सकती है और इनका लगातार प्रयोग कैंसरकारी भी हो सकता है।
डिस्पोजल्स को खुले में या नालियों में फैंक देने से ड्रेनेज सिस्टम बाधित हो जाता है और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है।
डिस्पोजल की हल्की गुणवत्ता सेहत को नुकसान पहुँचा रही है और यह कई तरह के कैंसर का कारण भी बन सकता है। इनका लगातार प्रयोग बहुत हानिकारक है।
50 माइक्रोन से पतला प्लास्टिक एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित है। थर्माकोल के बने कप, प्लेट और जिन पर प्लास्टिक की पतली परत चढ़ी होती है सभी शामिल है। 50 माइक्रोन से कम का प्लास्टिक रिसाईकिल किया जाता सकता है जिससे पर्यावरण को अधिक हानि हो सकती है। बाजार में 11 व 18 माइक्रोन के प्लास्टिक व फॉयल पेपर भी मौजूद होते हैं जिनका प्रयोग खाद्य सामग्री के सेवन के लिए धडल्ले से प्रयोग किया जा रहा है जिनका कोई मानक भी तय नहीं होता है। अनजाने ही सही किंतु कहीं न कहीं हम जहर तो खा ही रहे हैं।
डिस्पोजल मानव शरीर व बाहरी पर्यावरणीय वातावरण के साथ धरती के लिए भी घातक है।
डिस्पोजल के प्रयोग से बचें और सिरेमिक, काँच व स्टेनलेस स्टील के कप-प्लेट आदि का प्रयोग सुरक्षित है।
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