खाना खाने का सही तरीका: इनसे बचें और ऐसा खाएं
तले हुए पदार्थ पेट को खराब करते हैं।
मीठे पदार्थ खून को खराब करते हैं।
नमक गुर्दों को खराब करते हैं।
अच्छा खाना खाए अर्थात् संतुलित व उचित भोजन लें।
भोजन की थाली में कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन, खनिज लवण, प्रोटीन व वसा अवश्य रूप से संतुलित मात्रा में लें।
दिन भर में जल भरपूर मात्रा में लें।
खाना ऐसा हो जिसे खाने से मजा भी आए और स्वास्थ्यवर्धकता के साथ पौष्टिक भी हो।
खाने के गुणों को नष्ट करके खाने का अभ्यास छोड़िए।
हरी सब्जियाँ व सलाद खूब लें।
महंगे फलों के बजाए मौसमी फल खूब खाएं।
गेहूँ की चोकर सहित आटे की रोटी व दलिया खानी चाहिए।
दालें बहुत अधिक सेवन नहीं करें लेकिन अल्प मात्रा में रोज जरूर सेवन करें।
पेट के सभी रोगों से मुक्ति के लिए जौ का आटा की रोटी सर्वश्रेष्ठ है।
भोजन के बीच व तुरंत बाद पानी नहीं पीएं। भोजन और पानी के बीच कम से कम एक घंटे का अंतराल रखें।
भूख से थोड़ा कम खाना खाया जाना चाहिए। तेज और खुल कर बहुत भूख लगने पर ही खाना खाएं।
भूख नहीं होने पर गुनगुना पानी का ग्लास या सूप, रस या कोई फल लेना बहुत अच्छा रहता है। खुल कर
भूख लगे तभी सम्पूर्ण आहार लेना चाहिए। खाने के हर कोर को 32 बार से भी अधिक चबाकर खाना चाहिए जिससे अच्छे रसों का निर्माण होने में आसानी हो सकें।
गन्ना, गुड़, खजूर, मुनक्का, किश्मिश, केला, आम, संतरा, शहद व अंगूर आदि संतुलित मात्रा में ही खाएं।
तीन भोजन के बजाए समय पर दो संतुलित भोजन भी अच्छा स्वास्थ्य दे सकता है।
पेट में कभी गड़बड़ी महसूस हो तो गुनगुना नीबू पानी के साथ उपवास कर लें।
अदरक, मैथी, कालीमिर्च, तुलसी, नीबू या अजवायन की चाय शरीर की आवश्यकता अनुसार लेनी चाहिए।
दूध, दही, छाछ, अंकुरित अनाज व मोटा अनाज पर्याप्त मात्रा में आहार में शामिल करें।
शुद्ध वायु का सेवन व स्नान करें।
बचें-
नाश्ते के नाम पर आरारोट, बिस्किट, डबल रोटी, पूरी, हलवा, कचौरी, समौसा, तरह-तरह के तैलीय पदार्थ, पराठें, खीर, नमकीन, मठरियां, केक, पेस्ट्री, खोया, बर्फी, चीनी, पिजा, चॉकलेट, कोक व टाफियां के सेवन से बचें।
नमक की मात्रा संतुलित रखें। बजाए अन्य नमक के खाने में प्रयोग के लिए सेंधा नमक बहुत ही अच्छा है।
भूख नहीं है तो औपचारिकता के लिए ही सही बिल्कुल भोजन नहीं करें। ठंूस-ठूंस कर या निगल कर खाना नहीं खाएं।
खट्टा दही, छाछ, चाय, कॉफी, शराब, सोफ्ट ड्रिंक्स, मुरब्बा, आचार, ठण्डे पेय, कोल्ड ड्रिंक्स व अधिक शरबत आदि से बचें। सभी अम्लता बढ़ाते हैं।
गैस की समस्या से ग्रस्त रोगी गर्म दूध नहीं लें।
जोड़ों में दर्द व गठिया रोगी छाछ, मट्ठा व दही कम से कम लें।
देर रात्रि भोज से बचें।
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