रोज दस मिनट ताली योग करिए और रोग भगाईए

ताली में पूरा विज्ञान छिपा है साथ ही एक्यूप्रेशर विज्ञान की दृष्टि से भी यह जानना बहुत ही महत्त्वपूर्ण है कि हाथों की हथेलियों में शारीरिक तंत्र से संबंधित केन्द्र बिन्दु स्थित है। इन केन्द्र बिन्दुआंे पर लगातार दबाव पड़ने से शरीर के सभी आंतरिक अंग-प्रत्यंग ऊर्जा पाकर अपना कार्य बहुत प्रभावी व संतुलित रूप से करने लगते है।
कम से कम 200 ताली रोज बजाईए और धीरे-धीरे संख्या भी बढ़ा दीजिए। ताली बजाने के बाद 10 मिनट तक हाथ नहीं धोने चाहिए।

दोनों हाथों को कंधे के समानान्तर सामने बिल्कुल सीधा रखें। दोनों हाथों के बीच एक-डेढ़ फुट का फासला रखंे। कोहनी व कंधे बिल्कुल ढ़ीला रखें और जोर-जोर से तालियां बजाईए। दोनों हाथों की अंगुलियां, पोर व हथेलियां आपस में बराबर दबाव के साथ टकराने चाहिए।
सरलतम और प्रभावशाली योग है रोज ताली बजाईए। किसी को प्रोत्साहित करना हो या उल्लास और जोश बढ़ाना हो ताली बजाने में चूकिए नहीं।
ताली रोगों से तो बचाव ही नहीं करती है बल्कि कई रोगों का सुंदर इलाज भी है।
ताली बजाने से खून में सफेद कणों को बल व शक्ति मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
लगातार 10 मिनट ताली बजाने से शरीर की चर्बी कम होने लगती है और वजन कम होने के साथ ही साथ मोटापा भी कम होने लगता है।
ताली बजाने से वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता हैं

चादर या कपड़े को झटके से झाड़ने पर धूण-कण व अन्य गंदगी साफ करते है इसी प्रकार ताली बजाने का नियमित योग करने से ताली के दौरान केन्द्र बिन्दुओं पर पड़ने वाले दबाव व झटकों से शरीर की नस-नाड़िया साफ होती है इनमें उत्पन्न हुई अवरूद्धता दूर होती है।
प्रकृति की नियामत व रोग हरण ताली के प्रभाव का पूर्ण लाभ तभी होगा जब दैनिक चर्या व आहार-विहार भी प्राकृतिक रूप से संतुलित हो असंतुलित व अप्राकृतिक कदापि नहीं हो।
छोटा शिशु को कुछ भी खुशी मिलने पर वह अपनी प्रसन्नता ताली बजाकर जाहिर करता है जबकि उसे तो ज्ञात भी नहीं होता और ना ही बौद्धिक रूप से ताली के लाभों से परिपक्व होता है किन्तु यह सब प्रकृति उससे करवाती है। इससे स्पष्ट की ताली मन को प्रफुल्लित व आनन्दित करती है।
नियमित रूप से 10 मिनट की ताली शरीर के रक्त में गर्मी प्रदान करके रक्त प्रवाह संतुलित कर देती है।
सिर से पैर तक की कई बीमारियों से छुटकारा आसानी से पाया जा सकता है। ताली बजाने के तुरंत बाद मूत्र विसर्जन करना बहुत ही फायदेमंद है।
सूरज उगने से पहले ठण्डी व ताजा हवा में रोज 10 मिनट ताली बजाईए और प्रभाव खुद देखिए। बंद व एसी वाले कमरों में ताली बजाने का अभ्यास करने का कोई फायदा नहीं बल्कि नुकसान अधिक हो सकता है।

ताली कभी भी नंगे पैर नहीं बजाए। पैरों में मोजे जरूर पहनें क्योंकि ताली के प्रभाव से उत्पन्न विद्युतीय ऊर्जा पैरों की ओर से जमीन में नहीं जाकर शरीर में ही प्रवाहित होती रहती है और हथेलियों में तेल मल लें जिससे हाथों व शरीर की गर्मी तेल में रम जाती है।
ताली बजाने से बवासीर, पार्किन्सन, मधुमेह, थॉयराईड, श्वसन, स्नायु पाचन व उत्सर्जन तंत्र संबंधी अनेक पुराने से पुराने रोग भी ताली के नियमित अभ्यास से ठीक होने लगते हैं।
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