नारीयल सर्वरोगहारी फल और स्वाभाविक आहार है।
नारीयल स्वाभाविक आहार है जिसमें खनिज लवण, वसा, कैल्शियम, फॉस्फोरस, सोडियम, क्लोरिन, आयोडीन, सल्फर, प्रोटीन व विटामीन बी1 आदि उपलब्ध है। यह सर्वरोगहारी फल है।
पका नारीयल धूप के अधिक संपर्क में रहने के कारण इसकी गुणवत्ता और बढ़ जाती है। नारीयल का गुदा स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है।
नारीयल का दूध पोषण की दृष्टि से पूर्ण आहार हो सकता है।
बीमारियों को दूर भगाएं
पर्याप्त रेशा होने के कारण कब्ज दूर करता है। नारीयल के गुण अल्सर, कोलाईटिस और कमजोर पाचन शक्ति वालों के लिए आहार के साथ बहुत अच्छी औषद्यी भी है।
पाचन क्रिया के स्वस्थ यांत्रिक संचालन के लिए विटामीन बी1 बहुत महत्त्वपूर्ण है।
यौवन बनाए रखने के लिए नारीयल का दूध बहुत अच्छा स्रोत है इसमें विटामीन ए भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
नारीयल का पानी बहुत ही स्वादिष्ट, हृदय के लिए हितकारी, अग्निदीपक, शुक्रजनक, वस्तिशोधक तथा प्यास एवं पित्त को शांत करने वाला भी है।
जिस प्रकार दूध का पाऊडर बनता है इसी प्रकार नारीयल के दूध का पाऊडर भी बनने लगा है। नारीयल से दूध बनाने की प्रक्रिया में नारीयल की गंध व विटामीन ए का क्षरण नहीं होता है।
नारीयल के दूध में 50 प्रतिशत पानी और 25 प्रतिशत वसा होती है और अन्य 25 प्रतिशत में कार्बोहाईडेट, प्रोटीन व अन्य तत्त्व पाए जाते है। नारीयल दूध में खनिज लवण की मात्रा अधिक होती है जिससे अधिक प्रोटीन से होने वाले खतरे का भय नहीं होता है।
नारीयल के दूध में पूर्ण प्रोटीन होता है जोकि हल्का व सुपाच्य होता है। इसमें सभी महत्त्वपूर्ण एमिनो-एसिड होते है। अन्य दूध पाऊडर फ्रीज में रखे जाते है किंतु नारीयल दूध पाऊडर के खट्टे होने की कोई आशंका नहीं होती है जिसे फ्रीज में रखने की भी कोई आवश्यकता नहीं होती है।
नारीयल में स्थित कैल्शियम और फॉस्फोरस की अधिक मात्रा होने के कारण दांतों, हड्डियों और मांसपेशियों को सशक्त करता है।
नारीयल खून के गाढ़ेपन के लिए भी उत्तरदायी है।
वे व्यक्ति जो अच्छे स्वास्थ्य की दृष्टि से कैल्शियम युक्त आहार बहुत लेते है वे जान लें कि पर्याप्त मात्रा में फॉस्फोरस के अभाव में अच्छे स्वास्थ्य का प्रयास सफल होने वाला नहीं है।
गौर करें यदि नारीयल का दूध पर्याप्त मात्रा में पीते है तब आश्वस्त हो जाईए कि कैल्शियम और फॉस्फोरस का संयोग एक अच्छे स्वाद में मिल रहा है।
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