गर्भवती की दैनिक चर्या क्या हों? What are the daily routine of pregnant women?

गर्भवती की दैनिक चर्या क्या हों?

गर्भवती के साथ विश्वास व आत्मीय संबंध स्थापित करें।

गर्भवती के साथ विश्वासपूर्ण संबंध स्थापित करें ।

स्त्री स्वयं तथा शिशु की बेहतर देखभाल कर सकें इस हेतु ष्शारीरिक, मनोवैज्ञानिक तथा भावनात्मक रूप से प्रसव हेतु तैयार करना होता है। इस हेतु सतत् जाँच का महत्त्व समझाया जाता है जिससे उसके स्वास्थ्य को उन्नत बनाया जा सकें।

भोजन संबंधी पूर्ण जानकारी कि गर्भावस्था में पर्याप्त मात्रा में भोजन लेना चाहिए कि जिससे स्वयं मात एवं गर्भ में पल रहे बच्चे की उर्जा संबंधी सभी आवश्यकताएं पूरी हो सकें।

स्त्री को भूखा रहने से बचना चाहिए कि गर्भावस्था के दौरान अधिक भोजन की आवश्यकता होती है एवं ऐसा ष्शरीर में होने वाले परिवर्तन एवं गर्भ के बच्चे की आवश्यकताओं के कारण होता है।

भोजन सुपाच्य एवं हल्का होना चाहिए। इसमें पोषक पदार्थ उचित मात्रा में होने चाहिए। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में एवं बार-बार भोजन करना चाहिए।

गर्भवती स्त्री को पूरक लौह युक्त आहार दिया जाना चाहिए। आराम तथा सोना-गर्भवती स्त्री को सलाह दी जाती है कि वह अपने दैनिक कार्य पहले की भाँति करती रहे परन्तु भारी वनज उठाने से बचना चाहिए।

गर्भवती को दिन में 2-3 घंटे के साथ सम्पूर्ण चर्या में लगभग 10 घंटे आराम करना चाहिए। सोते समय यथासंभव बाई ओर करवट का प्रयोग करें।

साफ-सफाई अर्थात् स्वच्छता-प्रातः काल दैनिक क्रिया में दैनिक रूप से नहाएं, धूप में सुखाए हुए साफ कपड़े पहनने चाहिए।

दाँतों साफ करने हेतु नियमित ब्रश, मंजन इत्यादि किया जाना चाहिए।

बालों की नियमित सफाई की जानी चाहिए।

जननांगों की सपफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। कांख, जांघे तथा नाभि के नीचे क्षेत्र की विशेष सफाई करनी चाहिए।

वस्त्रादि-गर्भावस्था में स्वच्छ तथा ढीले कपड़े पहनने चाहिए। अधिक कसे या टाईट कपड़े से बचना चाहिए।

उंची ऐड़ी हील युक्त जूते तथा चप्पल न पहने क्योंकि गर्भावस्था के दौरान ष्शरीर का संतुलन तुलनात्मक कम रहता है।

गर्भावस्था के दौरान स्त्री को स्तनों की देखभाल समुचित करनी चाहिए। स्वयं के द्वारा ही स्तनों की जाँच करते रहना चाहिए और गांठ होने पर तुरन्त जाँच करवाई जानी चाहिए। निप्पल का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए एवं यदि यह समतल या अंदर की ओर मुड़ा हो तो इसे नियमित रूप से बाहर की ओर खींचना चाहिए।

आहार की सतर्कता के साथ योग्य व प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही सामान्य भ्रमण, प्राणायाम व योगादि का अभ्यास भी किया जाना चाहिए।

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