बी तथा एबी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति हल्के-फुल्के व्यायाम व योग आदि करें। भारी योगाभ्यास व व्यायाम से बहुत जल्दी थकान होने लगती है।
ए ब्लड ग्रुप के व्यक्ति हल्का-फुल्का योग, तैरना व भ्रमण आदि करें क्योंकि अधिकांशतः इस ग्रुप के व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति मजबूत नहीं होती है। अधिक भारी योगाभ्यास व व्यायाम से इम्यून सिस्टम पर बुरा असर पड़ सकता है।
ओ ब्लड ग्रुप के व्यक्ति तेज भ्रमण, तेज साईक्लिंग, टेनिस, बेडमिंटन व अन्य भारी गतिविधियों में सक्रिय रह सकते हैं। ओ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति जल्दी अवसाद का शिकार होने लगते हैं। समुचित योगाभ्यास व व्यायाम से ओ ब्लड समूह के व्यक्ति में अवसाद का स्तर कम होने लगता है।
जब पाचन तंत्र व ब्लड ग्रुप के परस्पर विरोधी योगाभ्यास व व्यायाम का प्रभाव दिखता हो तब ऐसी स्थिति में एक दिन हल्की-फुल्की तथा एक दिन भारी योगाभ्यास, व्यायाम व कसरत आदि कर ली जानी चाहिए। इस प्रकार दोनों व्यायामों का लाभ मिल जाएगा और हानि भी नहीं होगी।
जरूरत से ज्यादा या शक्ति व सामर्थ्य से ज्यादा बहुत अधिक योगाभ्यास व व्यायाम आदि हानिकारक होता है।
व्यायाम बिल्कुल नहीं करने वालों में कैन्सर होने की आशंका अधिक होती है किंतु बहुत ज्यादा व्यायामक रने वालों में मेलानोमा कैंसर व ब्रेन ट्यमर का खतरा बढ़ने की आशंका भी अधिक रहती है।
जरूरत से ज्यादा व्यायाम व योगाभ्यास से हृदय गति तेज हो जाती है। बेहोशी, थकावट, अनिद्रा, मंदाग्नि, डायरिया व मांसपेशियों में दर्द आदि की समस्याएं प्रकट हो जाती है।
जरूरत से ज्यादा व्यायाम व योगाभ्यास से फ्री रेडिकल्स की संख्या बढ़ने लगती है अर्थात् इनका अधिक निर्माण होने लगता है जिसके कारण इम्यून सिस्टम पर बुरा असर होता है ओर यह कमजोर हो जाता है।
जिन लोगों को शारीरीक मजबूरी के कारण योगाभ्यास व व्यायाम से वंचित रहना पड़ता हो वे लोग दीर्घश्वास प्रेक्षा द्वारा पूरा लाभ उठा सकते हैं।
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