शहद रोग भगाएं और सावधानियां जानिए (भाग-2)

केला और शहद मिलाकर बच्चों को खिलाने से बच्चों की मिट्टी खाने व चाटने की आदत छूट जाती है।
दही में शहद मिलाकर बच्चों को खिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
बिस्तर में पेशाब करने की आदत दूर करने के लिए बच्चों को रात में सोने से पहले दूध में शहद मिलाकर पिलाने से यह आदत छूट जाती है।
दाँत निकलते समय बच्चों को शहद चटाने से पीड़ा व समस्याएं कम होती है और बच्चों को तंदुरूस्त रखता है।
उच्च रक्तचाप और निम्न रक्तचाप दोनों ही स्थितियों के लिए शहद गुणकारी है। यह रक्त का प्रवाह संतुलित रखता है।
रात को बार-बार पेशाब के लिए उठकर जाने की समस्या से निजात पाने के लिए रात को सोते समय एक चम्मच शहद लेने से यह परेशानी दूर हो जाती है।
शहद में स्थित पोटेशियम कीटाणुओं को मारता है टाईफाईड, मलेरिया, ब्रोन्काईटिस व निमोनिया आदि में इसका सेवन बहुत हितकारी है।
गर्भावस्था में प्रोटीन बहुत आवश्यक होता है। शहद के प्रोटीन तत्त्व गर्भस्थ शिशु मंे चले जाते हैं। शहद में स्थित हार्मोन्स गर्भावस्था में यौवन और रंग रूप बनाए रखता है।
गर्भवती महिलाओं को रोज दो चम्मच शहद का सेवन कराने से खून की कमी नहीं आ पाती है। बच्चा सुंदर, मोटा-ताजा, आकर्षक, शारीरिक व मानसिक शक्ति से हृष्ट-पुष्ट होता है।
सावधानियां-शहद हानिकारक हो सकता है इसलिए
शहद को कभी भी आँच पर गर्म नहीं करें।
अधिक गर्म पानी या गर्म दूध में शहद डालकर नहीं पीएं।
शहद और पानी का मिश्रण केवल भूखे पेट ही लेना चाहिए। खाना खाने के बाद नहीं लेना चाहिए।
सर्दियों में गुनगुना पानी में शहद मिलाकर लिया जा सकता है।
कई लोगों को शहद अनुकूल प्रतीत नहीं होता हो या हानि प्रतीत होती है तब इसके साथ
वसा अर्थात् घी, तेल, मक्खन या अन्य चिकनाई के साथ बराबर मात्रा में शहद लेने से यह जहर समान बन जाता है।
नीबू का प्रयोग विकारों को दूर कर लाभ पहुँचाता है।
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