क्या घर के अंदर प्रदूषण अधिक घातक है? जानिए कैसे?
घरों और शहरों की प्राणवायु काफी प्रदूषित और जानलेवा हो चुकी है। इसका आधा इलाज डॉक्टर के पास और आधा सोच में है।

सड़क और आस-पास के धूल के कण, वाहनों से उड़ता धुंआ, प्रदूषण, नहीं दिखने वाले धुंए के कण, धुंआ आदि से हमारे आसपास की फिजा जहरीली हो रही है। पीएम अर्थात् पर्टीकुलेट मैटर 2.5 और पर्टीकुलेट मैटर 10 के कण अधिक खतरनाक होते हैं यह दोनों आंखों से नहीं देखे जा सकते है किंतु होते जानलेवा व खतरनाक है।
कार्बन मोनो ऑक्साइड, सल्फर डाईऑक्साईड, नाइट्रिक ऑक्साईड व सीसा मिलने से हवा प्रदूषित हो रही है और फेफड़ों की कार्यक्षमता तथा लचीलापन कम हो रहा है।
घर के भीतर हो रहा प्रदूषण 10 गुना अधिक से घातक है। प्रदूषण के प्रभाव से आँखों में जलन, फेफड़े खराब होना, अस्थमा, एलर्जी, खाँसी, कैंसर, हृदय रोग, सी ओ पी डी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव प्लमोनरी डिजीज), गले में खराश, नाक बंद, श्वास लेने में दिक्कत, सिर दर्द, ब्रोंकाईटिस, गले में एलर्जी, सीने में दर्द, कफ, छींकों का आना और चिड़चिड़ापन आदि के साथ व्यवहार में भी बदलाव आ रहा है। हवा के साथ केमीकल व धूल के कण श्वास नलिकाओं में प्रवेश करने से नलिकाओं में सूजन, व कैंसर आदि की समस्याएं प्रकट हो जाती है।
फेफड़ों की क्षमता जांचने के लिए खून व प्लमोनरी फंक्शन, एक सेकण्ड में फेफड़ों की हवा निकालने की क्षमता जांचने के लिए डिफ्यूजन टेस्ट और प्रदूषित हवा को जांचने के लिए स्मो चेक से परीक्षण किया जाता है।
प्रदूषण से बचने के उपाय क्या-क्या करें
घर में बिजली के उपकरण जैसे फ्रीज, माइक्रोवेव, ऑवन, तथा एयर कंडीशनर आदि भी प्रदूषण के कारक है। इनकी भी समय-समय पर सर्विसिंग करवाते रहना चाहिए।
केमीकल युक्त अधिक प्रभावशाली अगरबत्ती, धूप बत्ती व कीटनाशकों से बचना चाहिए।
सुगंधित व रसायन वाले डिटर्जेंट व नहाने तथा हाथ धोने वाले साबुनों से बचना चाहिए।
घर के सामान आदि को व्यवस्थित रखें और धूल आदि से बचाव करना चाहिए।
घर को बंद बिल्कुल नहीं चाहिए। दरवाजे व खिड़कियां खुली रखने चाहिए जिससे घर का पर्यावरण हवादार बना रह सकें।
घर में धूम्रपान व नशा आदि नही करना चाहिए।
जहाँ तक हो सकें धूप हो तब ही घर से बाहर निकलना चाहिए।
कीटनाशकों का प्रयोग घर में कम से कम करें यदि करना भी पड़े तो मुहँ पर कपड़ा बांधकर सावधानी से करना चाहिए।
घर में सीलन व नमी आदि को जल्द से जल्द हटा देना चाहिए।
अनावश्यक और अनुपयोगी वस्तुओं को घर से बिल्कुल बाहर कर देना चाहिए।
सर्दी, कोहरा या शीतलहर हो तब बाहर निकलने से बचें।
सुबह तथा शाम घर पर ही रहना अधिक अच्छा है।
घर से बाहर निकलना ही जरूरी हो तब मुहँ पर गीला कपड़ा की पट्टी बांध कर निकलना चाहिए।
मेडीकल मॉस्क या ट्रिपल लेयर मास्क पहनना चाहिए।
हमेशा गर्म भोजन करना चाहिए।
प्रदूषण रहित स्थान पर योग तथा व्यायाम आसन जरूर करें ऐसा करने से ऑक्सीजन का प्रवाहन अधिक होता है और फेफड़े फिल्टर होते हैं। एक जगह बैठे रहने से ऑक्सीजन की कम आवश्यकता होती है।
घर में तुलसी, ग्वारपाठा, मनी प्लांट व पाम ट्री की पौध लगानी चाहिए।
तुलसी, नीम या शहद-त्रिफला का सेवन करने से प्रदूषण का प्रभाव कम होता है।
नाक में दो बूंद शुद्ध घी रात को सोते समय डालें।
दो चम्मच घी का सेवन रोज करना चाहिए।
अदरक का सेवन किसी न किसी रूप में जरूर करना चाहिए।
सावधानी रखने से हानिकारक पदार्थ लीवर और फेफड़ों में जमा नहीं हो पाते हैं।
सावधानी ही अच्छा उपाय है।
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