किताबों से भी प्यार करें बहुत कुछ सीखा देती हैं
जिंदगी में आगे बढ़ना है, लक्ष्य प्राप्त करना है, रचनात्मकता का विकास करना है या नया और अच्छा सीखना है तो किताबों से बेहतर और कोई दूसरा साथी व दोस्त हो ही नहीं सकता है।
किताबों का रिश्ता हमसे अनोखा होता है। किताबें सही और गलत का अंतर करना सीखा देती है।
- मोबाईल, कम्प्यूटर, टीवी, टेब व लेपटॉप की दुनिया में कुछ पल किताब पढ़ने के शौक के लिए भी बचा लिजिए।

किताबें एक तरह से मानसिक भोजन की पौष्टिकता प्रदान करती हैं। लोग किताबों से दूर भागना छोड़ कर घर में सदस्यों में किताबों के प्रति रूचि बढ़ानी चाहिए और घर के कोने में छोटी सी लाइब्रेरी बना लेनी चाहिए क्योंकि किताबें अच्छी मार्गदर्शक होती है आपका पूरा व्यक्तित्व बदल देने की क्षमता होती है इन पुस्तकों में तो फिर इनसे दूर क्यों जाना?
घर के बड़े सदस्यों को बच्चों में पुस्तके पढ़ने की आदत डाल देनी चाहिए जिससे याददाश्त भी बढ़ती है और इस आदत के कारण बच्चों में जनरल नोलेज भी बहुत बढ़ता जाता है।
माँ-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी या बहन-भाई को देखकर बच्चे स्वतः ही वैसा ही सीखने लग जाते है इसलिए पुस्तकों का लगाव जब बड़े दिखाएंगे तो बच्चे तो खुद ब खुद आगे बढ़कर पुस्तकों में रूचि लेने लगते हैं।
किताबों का अलग सुखद संसार है। भिन्न-भिन्न तरह ही लाखों पुस्तकें बाजार व हमारे आसपास दिखाई देती है। कोई मुश्किल नहीं कि किताबें पढ़ नहीं पातें किंतु धीरे-धीरे किताबें पढ़ने की रूचि का विकास करके घर, बाहर, समाज, देश व विश्व की अलग-अलग जानकारियां प्राप्त करके अपडेट रहा जा सकता है।
पुस्तकें या अन्य सामग्री पढ़ने से भूत, वर्तमान और भविष्य तक सांसारिक वास्तविकता, कल्पना या रचनात्मकता का ज्ञान आसानी से हो जाता है। किताबों में हजारों तरह के किरदार मिलते है, हजारों तरह का ज्ञान मिलता है जो नहीं जाना अब तक उससे परीचित हो जाते हैं। ज्ञानेन्द्रियां व चक्षु केन्द्र खुल जाते हैं और किताबों को पढ़कर अपार ऊर्जा का प्रवाहन का अनुभव होता है।
दुनिया व समाज आपसे रिश्तें तोड़ देगा किंतु किताब आपके साथ एक नया रिश्ता जोड़ देगा।
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