हँसी के कोई साइड इफेक्ट नहीं है। फायदे ही फायदे है….
बिना खर्चे की दवा है हँसी। नकली हँसी भी मन व शरीर को स्वस्थ कर देती है।
शारीरिक व मानसिक कष्टों से छुटकारा आसानी से पाया जा सकता है।
हँसने से विचार तुरंत बंद हो जाते है।
तनाव, अवसाद, क्रोध, चिंता, आक्रामकता, उदासीनता व उन्माद सब खत्म होते चले जाते हैं।
हँसना भी सम्पूर्ण व्यायाम है जिससे सम्पूर्ण शरीर की मांसपेशियां प्रभावित होती है और अच्छे रसों का स्राव होता है।

हँसने के दौरान एक ओर एंडोकिन हार्मोन्स का स्राव होता है जिससे दर्द व सूजन कम होती है तो दूसरी ओर एक हार्मोन और स्रावित होता है जिसे इम्यूनोग्लोबिन कहते है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और जल्दी से संक्रामक रोग नहीं लग पाता है।
जोर की हँसी से पाचन तंत्र प्रभावित होने से आंते व अन्य अवयव सबल बनते हैं।
हँसने के दौरान अधिकतम ऑक्सीजन फेफड़ों में प्रविष्ट होती है और रक्तशुद्धि होती है।
हँसी व मुस्कुराहट प्रकृति की अमूल्य देन है।
किसी के लिए कोई बंदिश नहीं सभी आयु वर्ग के लिए अच्छी औषद्यी है।
हँसी नया जोश, उत्साह बढ़ाकर सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार कर देती है।
15-20 मिनट तक की हँसी से ही शारीरिक व मानसिक लाभ मिल जाता है।
हँसी के समय शरीर व मन एक हो जाता है।
आज की भाग-दौड़ जिन्दगी में चेहरे से हँसी गायब नहीं करें अन्यथा मन व शरीर में रोग घर बना लेते हैं।
अपना आचरण व व्यवहार ऐसा रखें कि आपकी एक मुस्कुराहट हजार चेहरों के होठों पर हँसी लेकर आएं।
मुस्कुराने की एक बार कोशिश ही आपको खुद को मुस्कुराना सीखा देगी।
आपकी एक मुस्कुराहट आपके परिवार का माहौल आनन्दित कर देगी। एक बार प्रारम्भ करना शेष है। शुरूआत आपसे करिएं….
मन खुश और आनन्दित हो जाता है। ठहाकें लगाकर हंसिए…मदमस्त होकर मुस्कुराईए….दिल खोलकर हँसिए….
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